पटना: बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में रविवार को जैसे सावन ही उतर आया। बाहर ही नहीं, भीतर भी वर्षा हो रही थी। बाहर बदरियाँ बरस रही थी और भीतर कवयित्रियाँ। संध्या के उतरने तक कवयित्रियों की कजरी और श्रावणी-गीतों की मूसलाधार-वर्षा में सुधी श्रोता भीगते और आनन्द उठाते रहे। लगातार चौथी बार डा अनिल सुलभ के अध्यक्ष निर्वाचित होने पर, उनके सम्मान में, सम्मेलन के महिला साहित्यिक विभाग के तत्त्वावधान में यह सावन-महोत्सव कवयित्री-सम्मेलन आयोजित हुआ था।

डा सुलभ का अभिनन्दन करती हुईं कवयित्री सम्मेलन की अध्यक्ष और वरिष्ठ साहित्यसेविका डा कल्याणी कुसुम सिंह ने कहा कि डा सुलभ के अध्यक्ष निर्वाचित होने के पश्चात ही सम्मेलन पुनः जीवित हुआ। हिन्दी भाषा और साहित्य के उन्नयन के लिए जितने कार्य इनके कार्यकाल में हुए, उतने सम्मेलन के १०६ साल के जीवन में कभी नहीं हुए। सम्मेलन ने अपनी खोयी गरिमा प्राप्त की और आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसकी चर्चा हो रही है। डा सुलभ ने लगातार १४ वर्षों तक सम्मेलन का अध्यक्ष होने का कीर्तिमान स्थापित किया है। सुलभ जी आजातशत्रु हैं।सम्मेलन की रक्षा और ऊन्नति के लिए डा सुलभ का अध्यक्ष बने रहना सम्मेलन की आवश्यकता है।

अपने कृतज्ञता-ज्ञापन में ड़ा सुलभ ने सम्मेलन के सभी साहित्यकार सदस्यों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि लगातार दूसरी बार निर्विरोध चुनकर जो सम्मान आपने दिया है, उससे मैं अभिभूत हूँ। विशेषकर सम्मेलन की विदुषी देवियों के प्रति मैं नत-मस्तक हूँ, जो संकट की घड़ियों में भी मेरा बल बन कर दृढ़ता से सामने आयीं और मेरा सारा बोझ उठा लिया। सम्मेलन के सभी कार्यों में महिला-साहित्यकारों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया है और सम्मेलन को ऊर्जा दी हैं।

सावन-महोत्सव कवयित्री-सम्मेलन में, हरे परिधानों में सजी-धजी कवयित्रियों ने एक से बढ़कर एक प्रेम और ऋंगार के रस में डूबे पावस-गीत सुनाकर काव्य-रसिकों का हृदय जीत लिया। प्रेम और ऋंगार के गीतों पर जहाँ तालियाँ और वाह-वाह की गूँज उठी, वहीं विरह-गीतों पर श्रोताओं के मुख से हाय-हाय भी निकलते रहे। चंदा मिश्र की वाणी-वंदना से आरंभ हुए इस कवयित्री सम्मेलन में वरिष्ठ कवयित्री डा पूनम आनन्द, डा पुष्पा जमुआर, आरा से पधारी डा रेणु मिश्र, डा प्रतिभा रानी, पूनम सिन्हा श्रेयसी, सागरिका राय, डा विद्या चौधरी, विभा रानी श्रीवास्तव, सुजाता मिश्र, अभिलाषा कुमारी, डा ऋचा वर्मा, डा सीमा यादव, शमा कौसर ‘शमा’, डा प्रतिभा पराशर, ज्योति मिश्र, आशा रघुदेव, उत्तरा सिंह, डा रेखा भारती, प्रेमलता सिंह राजपुत, नमिता लोहानी, लता प्रासर, राजप्रिया रानी, शिवानी गौड़, राजकांता राज, अनुभा गुप्ता, सुनीता रंजन, डा प्रियंका सिन्हा, निशा पराशर आदि कवयित्रियों ने भी अपनी सुमधुर काव्य-रचनाओं श्रोताओं को भाव-विभोर किया। मंच का संचालन सम्मेलन की संगठनमंत्री डा शालिनी पाण्डेय ने किया।

सभागार में श्रोताओं के बीच डा ध्रुव कुमार, कुमार अनुपम, डा नागेश्वर प्रसाद यादव, इंदु भूषण सहाय, हृदय नारायण झा, डा हेमंत कुमार,अश्विनी कविराज, नंदन कुमार मीत, कुमारी मेनका, डौली कुमारी, मनोज कुमार झा, रोहित कुमार, अजय झा आदि बड़ी संख्या में काव्य-प्रेमी उपस्थित थे।
