साहित्य सम्मेलन में ‘सत्यनारायण समग्र’ का लोकार्पण, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कवि को बताया कालजयी और अमर रचनाकार।
पटना: बिहार के राज्य-गीत ‘बिहार गीत’ के रचनाकार और प्रसिद्ध कवि सत्यनारायण की 93वीं जयंती साहित्य सम्मेलन में समारोहपूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर उनकी संपूर्ण रचनावली ‘सत्यनारायण समग्र’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकारों और कवि-कवयित्रियों ने उन्हें याद करते हुए काव्यांजलि अर्पित की।

समारोह का उद्घाटन बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने किया। उन्होंने कवि सत्यनारायण को कालजयी और अमर रचनाकार बताते हुए कहा कि जब तक बिहार का अस्तित्व रहेगा, तब तक राज्य-गीत के रचनाकार सत्यनारायण बिहार के कण-कण में जीवित रहेंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि कवि सत्यनारायण की स्मृति को स्थायी रूप से जीवित रखने और साहित्य सम्मेलन के उन्नयन के लिए सम्मेलन का प्रतिनिधिमंडल सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखे। उन्होंने आश्वस्त किया कि अच्छे प्रस्तावों को सरकार की ओर से पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। इसी दौरान उन्होंने कवि की संपूर्ण रचनावली ‘सत्यनारायण समग्र’ का लोकार्पण भी किया।
जनआंदोलनों और नुक्कड़ काव्य से जुड़े रहे सत्यनारायण
समारोह के मुख्य अतिथि एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार शिवदयाल ने कवि सत्यनारायण से जुड़ी अपनी स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि जय प्रकाश आंदोलन के दौरान व्याप्त तात्कालिक जड़ता को तोड़ने में नुक्कड़-काव्य आंदोलन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसी माध्यम से लोगों को कवि सत्यनारायण की काव्य प्रतिभा से परिचित होने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि सत्यनारायण उन कवियों में शामिल थे, जिन्होंने अपने समय की जनता की आकांक्षाओं को अपनी रचनाओं में स्वर दिया। उन्होंने केवल जनता की पीड़ा को शब्द नहीं दिए, बल्कि जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरकर भी अपनी भागीदारी निभाई।
‘सत्यनारायण समग्र’ को साहित्य की धरोहर बताया
साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा. अनिल सुलभ ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि कवि सत्यनारायण को समग्रता में पढ़ना अनुभूति के एक अभिनव संसार से जुड़ने जैसा है। उन्होंने कहा कि लोकार्पित पुस्तक हिंदी साहित्य की महत्वपूर्ण धरोहर के रूप में लंबे समय तक याद की जाएगी और आने वाली पीढ़ियों के साथ-साथ साहित्य के विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी साबित होगी।
डा. अनिल सुलभ ने सरकार से मांग की कि बिहार गीत के अमर रचनाकार की एक भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए और उनकी जयंती को राजकीय समारोह के रूप में मनाया जाए। उन्होंने कवि सत्यनारायण के नाम से कम से कम तीन लाख रुपये की पुरस्कार राशि वाला वार्षिक सम्मान शुरू करने का भी सुझाव दिया।
कार्यक्रम में बिहार विधान परिषद के सदस्य संजय मयूख, पटना की महापौर सीता साहू, डा. कुमार अरुणोदय, बिहार लोक सेवा आयोग के सदस्य निशीथ वर्मा, डा. कल्याणी कुसुम सिंह, बच्चा ठाकुर, संजीव कर्ण तथा कवि के ज्येष्ठ पुत्र संजय ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के आरंभ में साहित्य सम्मेलन के साहित्यमंत्री एवं लोकार्पित पुस्तक के संपादक भगवती प्रसाद द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने पुस्तक की विशेषताओं के साथ-साथ कवि सत्यनारायण के विराट साहित्यिक व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। मंच संचालन आयोजन समिति के संयोजक कमल नयन श्रीवास्तव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कवि के कनिष्ठ पुत्र संदीप स्नेह ने किया।
कवियों ने रचनाओं के माध्यम से किया स्मरण
जयंती समारोह के अवसर पर कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। इसकी शुरुआत चंदा मिश्र की वाणी-वंदना से हुई। वरिष्ठ कवयित्री भावना शेखर, डा. रत्नेश्वर सिंह, डा. आरती कुमारी, सविता राज, प्रो. सुनील कुमार अध्याय, शमा कौसर ‘शमा’, गोपाल फलक, हेमा सिंह, अनुपमा सिंह सोनी, प्रियंका श्रीवास्तव ‘शुभ्र’, मधुरेश नारायण, डा. किशोर सिन्हा, पूनम कतरियार, शुभ चंद्र सिन्हा, डा. एम.के. मधु, सिद्धेश्वर, पं. उमेश मिश्र, सुरेश चौबे, ज्योति मिश्र, डा. प्रतिभा रानी, डा. शशि भूषण सिंह, जय प्रकाश पुजारी सहित कई कवियों और कवयित्रियों ने गीत एवं गजल प्रस्तुत कर कवि सत्यनारायण को श्रद्धापूर्वक याद किया।
समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. उषा सिंह, वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानवर्धन मिश्र, डा. सुधा सिन्हा, प्रो. कृष्णा सिंह, डा. ज्योत्सना प्रसाद, प्रो. अरुण कुमार प्रसाद, डा. विद्या चौधरी, डा. नूतन सिन्हा, कमल किशोर वर्मा, डा. ऋचा वर्मा, मीरा प्रकाश, डा. अनुपमा सिन्हा, डा. दिनेश कुमार शर्मा, आशा रघुदेव, मोना स्नेह, अक्षरा स्नेह, बिंदेश्वर प्रसाद गुप्त सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और सुधीजन मौजूद रहे।
