दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार के केंद्र में आ गया है। करीब 303 अरब बैरल तेल भंडार के साथ यह दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल रिजर्व वाला देश माना जाता है। वर्षों तक आर्थिक बदहाली, खराब प्रबंधन और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इसकी उत्पादन क्षमता प्रभावित रही, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। उत्पादन बढ़ने के साथ वेनेजुएला दुनिया के लिए एक बड़े ऊर्जा विकल्प के रूप में उभर रहा है।
भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना वेनेजुएला
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर संकट के बीच भारत ने अपनी तेल आपूर्ति का दायरा बढ़ाया है। इसी का नतीजा है कि वेनेजुएला अब भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बन गया है। उसने सप्लाई के मामले में Saudi Arabia और United States जैसे बड़े देशों को पीछे छोड़ दिया है। मई 2026 में भारत ने वेनेजुएला से करीब 4.17 लाख बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा, जो उसके कुल निर्यात का 55 फीसदी से ज्यादा है।
भारी क्रूड ऑयल से सस्ता हो सकता है डीजल
वेनेजुएला का “मेरेय क्रूड” दुनिया के सबसे चर्चित हैवी क्रूड ऑयल में गिना जाता है। यह गाढ़ा और सल्फरयुक्त तेल है, जिससे बड़ी मात्रा में डीजल, जेट फ्यूल और डामर तैयार किया जाता है। भारतीय रिफाइनरियां, खासकर Reliance Industries और Nayara Energy, इस भारी तेल को प्रोसेस करने में बेहद सक्षम मानी जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला से सप्लाई बढ़ने पर वैश्विक बाजार में डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है।
अमेरिकी पाबंदियों में ढील से बढ़ा उत्पादन
अमेरिकी प्रतिबंधों में सीमित राहत मिलने के बाद Chevron जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने वेनेजुएला में निवेश बढ़ाया है। इसका असर सीधे तेल उत्पादन पर दिख रहा है। जहां 2020 में उत्पादन 4 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे पहुंच गया था, वहीं अब यह बढ़कर 11.36 लाख बैरल प्रतिदिन के पार पहुंच चुका है। यदि वेनेजुएला अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचता है, तो वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता आ सकती है।
भारत को मिलेगा रणनीतिक और आर्थिक फायदा
भारत के लिए यह साझेदारी सिर्फ सस्ते तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है। ONGC Videsh का वेनेजुएला के ऑयल ब्लॉक्स में बड़ा निवेश है, जो अब सुरक्षित होता नजर आ रहा है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के मुद्दे पर भी वेनेजुएला लगातार भारत का समर्थन करता रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग भविष्य में मजबूत भू-राजनीतिक साझेदारी का रूप ले सकता है।
