पटना : बिहार की चर्चित फ़िल्म अभिनेत्री छवि पाण्डेय के पिता और ललित कलाओं की सुप्रसिद्ध संस्था ‘नवरंग’ के संस्थापक कलाचार्य पं उमेश पाण्डेय नहीं रहे। उन्होंने शनिवार को अशोक राजपथ स्थित अपने आवास पर अपनी अंतिम साँस ली। इसीइस4 जनवरी को उनकी 80 पूर्ति हुई थी। वे एक गुणी कला-प्रशिक्षक और सरस्वती के विनम्र आराधक थे।

उनके निधन से कला और साहित्य जगत में शोक व्याप्त है। उनके निधन की सूचना मिलने पर बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष तथा ‘नवरंग’ के संरक्षक डा अनिल सुलभ तथा सुप्रसिद्ध रंगकर्मी कुमार अनुपम ने उनके आवास पर जाकर उनका अंतिम दर्शन किया और पुष्पांजलि दी। अपने शोकोदगार में डा सुलभ ने कहा कि ललित कला केंद्र ‘नवरंग’ के माध्यम से स्वर्गीय पाण्डेय विगत पचास वर्षों से बच्चों और किशोरों को गायन-वादन और नृत्य में प्रशिक्षित कर रहे थे। अनेक पीढ़ियाँ उनसे मार्ग-दर्शन पाती रही हैं। बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव और विधायक श्याम रजक ने भी उनके आवास पर आकर शोक-प्रकट किया तथा परिजनों को सांत्वना दी।

रविवार को दूसरे पहर गुल्बी घाट पर पं पाण्डेय का अग्नि-संस्कार संपन्न हुआ। उनके एक मात्र पुत्र मनीष पाण्डेय ने मुखाग्नि दी। अपने पीछे अपनी विधवा गीता पाण्डेय, अनुज जयंत पाण्डेय, पुत्रियाँ रश्मि, पल्लवी और छवि, पौत्र अयांश समेत एक बड़ा शोकाकुल परिवार छोड़ गए हैं। शोकाकुल परिजनों में नीलेश पाण्डेय , श्यामल मिश्रा, संजय पाण्डेय, कुणाल शुक्ला और विभाकर सम्मिलित हैं।

शोक व्यक्त करने वालों में पटना विस्व विद्यालय के अधिषद सदस्य नीतीश टंडन, सीताराम और बड़ी संख्या में नवरंग ललित कला केंद्र के विद्यार्थी शामिल हैं।