पटना: पटना हाई कोर्ट ने एक अहम और कड़ा निर्णय सुनाते हुए आमस-दरभंगा नेशनल हाईवे के निर्माण पर लगी रोक को समाप्त कर दिया है। जस्टिस विवेक चौधरी की एकलपीठ ने बिहार स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल के 15 मई 2025 के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया, जिससे लंबे समय से अटका निर्माण कार्य अब फिर से शुरू हो सकेगा।

कोर्ट की दो-टूक: विकास कार्यों में बाधा बर्दाश्त नहीं

हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक हित और बुनियादी ढांचे के विकास को धार्मिक या भावनात्मक आधार पर रोकना कानूनन उचित नहीं है। अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में यह भी दोहराया कि ऐसे मामलों में संतुलित और विधिसम्मत दृष्टिकोण जरूरी है।

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष पर तीखी टिप्पणी

कोर्ट ने वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। आदेश में कहा गया कि अध्यक्ष, जो स्वयं न्यायिक सेवा से जुड़े हैं, कानून की सही व्याख्या करने में असफल रहे। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि उनका झुकाव एक “खास समुदाय” की ओर दिखाई देता है, जो न्यायिक पद की निष्पक्षता के खिलाफ है।

चीफ जस्टिस तक पहुंचेगा मामला

हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि अध्यक्ष की कार्यशैली और आचरण की जानकारी चीफ जस्टिस तक पहुंचाई जाए। कोर्ट का मानना है कि इस तरह का व्यवहार न्यायिक प्रणाली की गरिमा को प्रभावित करता है। इस टिप्पणी के बाद न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

क्या था पूरा विवाद?

मामला समस्तीपुर जिले के शाहपुर बघनुई और मोहिउद्दीनपुर राजवा मौजा से जुड़ा है, जहां कब्रिस्तान और मस्जिद की जमीन के कुछ प्लॉट्स के अधिग्रहण को चुनौती दी गई थी। वक्फ ट्रिब्यूनल ने धार्मिक आधार पर निर्माण पर रोक लगा दी थी, जिसे अब हाई कोर्ट ने गलत ठहराया।

NHAI को बड़ी राहत, काम फिर शुरू

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की याचिका को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने हाईवे निर्माण को प्राथमिकता दी। अब आमस-दरभंगा एनएच परियोजना बिना किसी कानूनी अड़चन के आगे बढ़ेगी।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय भविष्य के ऐसे मामलों के लिए मिसाल बनेगा, जहां धार्मिक आधार पर विकास परियोजनाओं को रोका जाता है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक हित सर्वोपरि है।