पटना: महागठबंधन के नेता पिछले कई दिनों से यह दावा कर रहे थे कि बिहार सरकार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो चुकी है और राज्य का खजाना लगभग खाली है। विधानसभा और विधान परिषद में भी विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के पास खर्च चलाने के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं बची है। उनका कहना था कि नीतीश सरकार का राजकोष लगातार घट रहा है।

अब ताजा घटनाक्रम से इन आरोपों को कुछ बल मिलता दिखाई दे रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन चरण में सरकार ने कोषागारों से बिलों के भुगतान को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। वित्त विभाग के विशेष सचिव मुकेश कुमार लाल द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि 10 मार्च 2026 तक केवल वेतन, पेंशन, सहायक अनुदान के वेतन तथा संविदा कर्मियों के मानदेय से जुड़े बिल ही कोषागारों में स्वीकृत किए जाएंगे। अन्य मदों के भुगतान पर फिलहाल रोक रहेगी।

वही होली से पहले बिहार सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत दी है। राज्य के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने विधानसभा में घोषणा की कि फरवरी 2026 का वेतन त्योहार से पहले ही कर्मचारियों के खातों में भेज दिया जाएगा। इस फैसले से करीब 7.5 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिलेगा, जिनमें लगभग 5.85 लाख शिक्षक और प्रधानाध्यापक शामिल हैं।

वेतन-पेंशन भुगतान को प्राथमिकता

वित्त विभाग ने सभी विभागों और कोषागारों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वेतन, पेंशन, अनुदान-इन-एड और संविदा कर्मियों के मानदेय से जुड़े बिलों का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। सरकार का लक्ष्य है कि होली से पहले किसी भी कर्मचारी को भुगतान में देरी का सामना न करना पड़े।

10 मार्च तक गैर-प्रतिबद्ध खर्चों पर अस्थायी रोक

वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम चरण में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए 10 मार्च 2026 तक गैर-प्रतिबद्ध मदों के भुगतान पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। 27 फरवरी 2026 को वित्त विभाग के विशेष सचिव मुकेश कुमार लाल द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सिर्फ स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय से जुड़े बिल ही पारित किए जाएंगे।

बिहार कोषागार संहिता, 2011 के नियम-76 और 177 का हवाला देते हुए अनावश्यक निकासी पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

क्यों लिया गया यह फैसला?

वित्त विभाग के अनुसार, हर साल वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में बड़ी संख्या में बिल एक साथ प्रस्तुत होने से जांच प्रक्रिया प्रभावित होती है। इससे अनियमितता की आशंका बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कोषागारों को सख्ती से नियमों का पालन करने को कहा गया है। इससे पहले 6 फरवरी को भी इसी तरह के निर्देश जारी किए गए थे।

10 मार्च के बाद क्या होगा?

10 मार्च के बाद निर्माण कार्य, आपूर्ति और अन्य अनुबंधों से जुड़े बिलों की नियमित जांच के बाद भुगतान की प्रक्रिया शुरू होगी। सभी विभागों, प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और कोषागार अधिकारियों को आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

कर्मचारियों में खुशी

सरकार का कहना है कि राज्य की वित्तीय स्थिति पूरी तरह संतुलित है और वेतन भुगतान में किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। होली जैसे बड़े त्योहार से पहले वेतन और पेंशन की समय पर अदायगी से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों में उत्साह का माहौल है।

इस फैसले के जरिए सरकार ने एक ओर जहां त्योहार से पहले आर्थिक राहत दी है, वहीं दूसरी ओर वित्तीय अनुशासन को भी प्राथमिकता देकर राज्य की आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने का संदेश दिया है।