पटना : बिहार विधान मंडल का सत्र समाप्त हो गया। 28 फरवरी से 27 मार्च के बीच विधायी और वित्तीय कार्य संपन्न हुए। सत्रहवीं विधान सभा का यह अंतिम बजट सत्र था। जुलाई-अगस्त में 5 दिनों का मानसून सत्र होगा, जो समापन सत्र होगा। इसके बाद 18वीं विधान सभा के गठन के बाद बैठक होगी।
गुरुवार को सत्र समापन के मौके पर विधायकों को विधान सभा की ओर से 14 हजार के टैबलेट के साथ कार्टन में बंद सामान भी प्रसाद स्वरूप दिया गया। इसे आप विदाई गिफ्ट भी कह सकते हैं। हालांकि सत्र के दौरान सभी विभागों की ओर से बैग, अटैची और अन्य सामान विधायकों एवं विधान पार्षदों को गिफ्ट में बांटे गये थे।
विधान सभा चुनाव के दौरान हर चुनाव में कम से कम 10 फीसदी विधायक विभिन्न कारणों से दलीय टिकट से वंचित रह जाते हैं। उसमें कुछ दूसरे दल के टिकट पर चुनाव लड़ लेते हैं तो कुछ निर्दलीय भी किस्मत आजमा लेते हैं। 16वीं विधान सभा के 5 विधायक जदयू में शामिल हो गये थे और उसी दल के टिकट पर चुनाव मैदान में थे। पांचों चुनाव हार गये। मतलब दल बदल कर अनुकूलन की संभावना हर बार आपके पक्ष में नहीं होता है। अभी सात विधायक सदन में दूसरे पक्ष के साथ बैठकर विधान सभा सचिवालय के सीने पर ईंट पीस रहे हैं। इनमें सिर्फ दो का नये दल में टिकट कंफर्म है, बाकी पांच का भविष्य अधर में लटक गया है। सत्तारूढ़ दल के भी कई विधायक अपने दल के नेतृत्व के निशाने पर हैं और उनका भविष्य भी अधर में टंगा है।
चुनाव में जीतने वाले विधायकों का ब्रेकअप बताता है कि हर चुनाव में लगभग 50-55 प्रतिशत विधायक अगली विधान सभा का मुंह नहीं देख पाते हैं। वे बेटिकट हो जाते हैं या चुनाव हार जाते हैं। इसी प्रकार 40-45 प्रतिशत विधायक ही नयी विधान सभा का मुंह देख पाते हैं। इस क्रम में लगभग 30-35 प्रतिशत पूर्व विधायक भी नयी विधान सभा में पहुंचते रहे हैं।