नई दिल्ली:  भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का सपना तेजी से साकार होता नजर आ रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि आने वाले वर्षों में बुलेट ट्रेन देश के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम कर देगी। उन्होंने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है और इसके अलावा सात नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को भी मंजूरी दी जा चुकी है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन पर तेजी से काम

रेल मंत्री के अनुसार मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना पूरी होने के बाद दोनों शहरों के बीच की यात्रा महज 1 घंटा 57 मिनट में पूरी हो सकेगी। परियोजना के विभिन्न सेक्शन पर एक साथ काम किया जा रहा है। सूरत-बिलीमोरा खंड का निर्माण कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना है, जबकि अगस्त 2027 में इसके उद्घाटन की योजना है।

मध्यम वर्ग के बजट में होगा बुलेट ट्रेन का सफर

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बुलेट ट्रेन केवल अमीरों के लिए नहीं होगी, बल्कि इसे मध्यम वर्ग और आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निजी वाहनों की तुलना में बुलेट ट्रेन एक सुविधाजनक और किफायती विकल्प साबित होगी। सरकार जल्द ही बुलेट ट्रेन का किराया भी घोषित करेगी।

सात नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को मिली मंजूरी

रेल मंत्री ने बताया कि सरकार ने सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को मंजूरी दी है। इन कॉरिडोर के शुरू होने के बाद प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।

प्रस्तावित यात्रा समय इस प्रकार होगा:

रेलवे नेटवर्क का तेजी से हो रहा आधुनिकीकरण

रेल मंत्री ने कहा कि देशभर में रेलवे ट्रैक के आधुनिकीकरण का कार्य तेजी से जारी है। अब तक लगभग 70 हजार किलोमीटर रेलवे ट्रैक का उन्नयन किया जा चुका है। इसके अलावा 36 हजार किलोमीटर नई पटरियां बिछाई गई हैं और करीब 60 हजार किलोमीटर रेल मार्ग का विद्युतीकरण किया गया है। वर्तमान में देश का 99.4 प्रतिशत रेलवे नेटवर्क इलेक्ट्रिफाइड हो चुका है।

वेटिंग लिस्ट खत्म करने की दिशा में काम जारी

ट्रेनों में बढ़ती वेटिंग लिस्ट को लेकर पूछे गए सवाल पर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे पर यात्रियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। जहां सालाना 35 करोड़ लोग हवाई यात्रा और 250 करोड़ लोग सड़क मार्ग से सफर करते हैं, वहीं रेलवे से करीब 750 करोड़ यात्राएं होती हैं। उन्होंने कहा कि वेटिंग लिस्ट की समस्या कम करने के लिए रेलवे को अगले कुछ वर्षों में 2,000 से 2,500 नई ट्रेनें शुरू करनी होंगी और इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

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