पटना : अगले वर्ष, ऊर्दू और हिन्दी के महान शायर ‘शाद’ अजीमाबादी की 100वीं पुण्यतिथि पर एक भव्य आयोजन किया जाएगा, जिससे देश के लोगों को मालूम हो कि बिहार की राजधानी पटना में ‘शाद’ जैसे एक महान शायर हुए थे, जिन्हें ‘ग़ालिब’ और ‘मीर’ भी अदब की नज़र से देखते थे। बुधवार को ‘नव शक्ति निकेतन’ के तत्त्वावधान में, नगर के लंगर गली, जिसका नाम अब ‘शाद’ अजीमाबादी पथ’ हो चुका है, में स्थित ‘शाद’ के मज़ार पर चादर-पोशी के बाद आयोजित हुई सभा में यह निर्णय लिया गया।

सभा की अध्यक्षता करते हुए, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि ‘शाद’ जैसे महान शायर को संप्रदाय और जाति के तंग नज़रिए से देखा जाना एक गुनाह है, पाप है। कवियों-शायरों की एक अलग जाति होती है और ये दुनिया के दीनो-धरम से बहुत ऊपर होते हैं। सबके होते हैं। उन्होंने इस महान शायर की ओर समाज की बेरुख़ी पर दुःख प्रकट किया और कहा कि साल में एक बार होने वाले इस मौक़े को भी लोग भूल जाएँगे, यदि ‘नव शक्ति निकेतन’ और इसके सचिव कमल नयन श्रीवास्तव याद न दिलाएँ। हमें इस अज़ीम शायर को वह स्थान दिलाना चाहिए, जिसके वे हक़दार हैं। डा सुलभ ने सभा को अवगत कराया कि साहित्य सम्मेलन ने जयंती-समारोहों की सूची में ‘शाद’ का नाम सम्मिलित कर लिया है और 2027 का महाधिवेशन उन्हें ही समर्पित रहेगा।

मुख्यअतिथि के रूप में उपस्थित स्थानीय विधायक रत्नेश कुशवाहा ने वरिष्ठ पत्रकार रेहान गनी के इस प्रस्ताव का समर्थन किया कि शाद की 100 वीं पुण्य तिथि को इस रूप में मनाया जाए कि दुनिया याद रखे। उन्होंने कहा कि इसके लिए अभी से तैयारी शुरू की जानी चाहिए। उनका पूरा सहयोग रहेगा।
पटना की महापौर सीता साहू ने श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि इस गली में ‘शाद’ की प्रस्तर-पट्टिका’ शीघ्र लगा दी जाएगी। जब इस गली का नाम उनके नाम से निगम द्वारा किया जा चुका है तो पट्टिका अवश्य ही लगनी चाहिए।
ऊर्दू अख़बार ‘क़ौमी तंजीम’ के संपादक अशरफ़ फ़रीद ने कहा कि दूसरे मुल्क के लोग अपने साहित्यकारों की जितनी इज़्ज़त करते हैं, उतनी हम नहीं कर पाते। यहाँ भी शाद का ऐसा स्मारक होना चाहिए जो ‘शेक्सपियर’ का अपने देश में है। साहित्य सम्मेलन के साहित्यमंत्री भगवती प्रसाद द्विवेदी ने ‘शाद’ को बिहार का गौरव बताया। वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानवर्धन मिश्र, रेहान गनी, शाद के प्रपौत्र शकील अहमद, मधुरेश नारायण तथा संस्था के अध्यक्ष रामा शंकर प्रसाद ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
आरम्भ में अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था के सचिव कमल नयन श्रीवास्तव ने सरकार से मांग की कि शतब्दी-समारोह के पूर्व शाद की मज़ार को ‘राष्ट्रीय-स्मारक’ घोषित करे तथा उनके सम्मान में स्मृति डाक-टिकट जारी हो।
इस अवसर पर, कवि रमेश कँवल (हिन्दी), डा अकबर खुरशीद (ऊर्दू), पूनम सिन्हा श्रेयसी तथा ज़ीनत शेख़ को (साहित्य एवं समाज सेवा के लिए) ‘शाद अजीमाबादी स्मृति सम्मान’ से विभूषित किया गया। कवि सुनील कुमार, शुभ चंद्र सिन्हा और फ़रीदा अंजुम ने अपनी रचनाओं से समारोह को यादगार बनाया। मंच का संचालन संस्था के सचिव कमल नयन श्रीवास्तव ने तथा धनयवाद-ज्ञापन प्रेम किरण ने किया।
सुप्रसिद्ध समाजसेवी अनंत अरोड़ा, वरिष्ठ पत्रकार अहमद रज़ा हाशमी, डा विनोद अवस्थी, लल्लू शर्मा, फ़िरोज़ हसन, रज़ी अहमद, अनिल रश्मि, आलोक चोपड़ा, राजेश राज, जकीर बक्श,मो अमीन, मनोज कुमार मिश्र, परितोष कुमार आदि प्रबुद्धजन उपस्थित थे।
