नई दिल्ली: ग्रामीण भारत का ज़िक्र होते ही हमारे ज़ेहन में परंपरा, मर्यादा, संस्कार और संस्कृति की एक सधी हुई तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या यही पूरी सच्चाई है? क्या ग्रामीण समाज उतना ही सरल और निष्कलुष है, जितना हम मानते आए हैं? वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका विनीता यादव की नई किताब ‘Wife Swapping in Rural India’ इन्हीं असहज सवालों से समाज का सामना कराती है।

यह किताब किसी कल्पना, अफ़वाह या सनसनीखेज़ कहानी पर आधारित नहीं है। बल्कि यह लगभग 20 साल पहले किए गए वास्तविक स्टिंग ऑपरेशन्स, प्रत्यक्ष मुलाक़ातों और ग्रामीण समाज के भीतर हुई खुली बातचीत का एक तथ्यात्मक और साहसी दस्तावेज़ है। उस दौर में विनीता यादव ने ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण इलाकों में जाकर उन दंपतियों से बात की, जिन्होंने ‘वाइफ स्वैपिंग’ जैसी प्रथाओं को अपने जीवन में स्वीकार किया था। उन्हीं बातचीतों, स्वीकारोक्तियों और अनुभवों को बिना किसी सजावट या बनावटीपन के इस पुस्तक में दर्ज किया गया है।

किताब यह सीधा सवाल उठाती है कि क्या इस तरह के व्यवहार केवल महानगरों या तथाकथित पश्चिमी प्रभाव तक सीमित हैं, या फिर यह सामाजिक विकृति अब छोटे शहरों और ग्रामीण भारत तक भी फैल चुकी है। लेखिका ने विवाह संस्था की कमजोर होती नींव, रिश्तों में बढ़ती असुरक्षा, सामाजिक पाखंड और ‘आधुनिकता’ की गलत समझ को बेहद सहज लेकिन गहराई से सामने रखा है।

विषय जितना संवेदनशील है, प्रस्तुति उतनी ही संतुलित। पुस्तक की भाषा कहीं भी अश्लीलता या फूहड़पन की ओर नहीं जाती। यह किताब सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और कानूनी पहलुओं को साथ लेकर चलती है और यह भी बताती है कि ऐसी प्रवृत्तियाँ किस तरह ब्लैकमेलिंग, अपराध, शोषण और घरेलू हिंसा जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म देती हैं। एक महिला पत्रकार द्वारा इस विषय पर लिखी गई यह कृति इसलिए भी खास है, क्योंकि इसमें महिलाओं की मजबूरियाँ, उनके अनुभव और समाज का दबाव बहुत संवेदनशीलता के साथ सामने आता है।

इस महत्वपूर्ण पुस्तक की भूमिका (Foreword) भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के. जी. बालकृष्णन ने लिखी है। वे पुस्तक विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे, जो इस कृति को केवल सामाजिक ही नहीं, बल्कि संवैधानिक और नैतिक दृष्टि से भी विशेष महत्व प्रदान करता है।