पटना :  बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में मंगलवार को हिन्दी और संस्कृत के प्रख्यात विद्वान, भाषावैज्ञानिक एवं साहित्यालोचक आचार्य देवेंद्रनाथ शर्मा की जयंती साहित्यिक गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में एकल कथा-पाठ और लघुकथा-गोष्ठी ने साहित्य प्रेमियों को समृद्ध किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कहा कि आचार्य देवेंद्रनाथ शर्मा पुरातन भारतीय ज्ञान परंपरा के वैज्ञानिक व्याख्याकार थे। भारतीय दर्शन, वैदिक साहित्य, भाषा-विज्ञान और साहित्यालोचन पर उनकी गहरी पकड़ थी। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय और दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में भी उल्लेखनीय सेवाएँ दीं। काव्यशास्त्र, अलंकार और साहित्यालोचन पर लिखी गई उनकी पुस्तकें आज भी विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक हैं।

डॉ. सुलभ ने कहा कि आचार्य शर्मा उन विरले महापुरुषों में थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, कला और संगीत जैसे मानवीय मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित कर दिया। वे सच्चे अर्थों में एक ‘संस्कृति-पुरुष’ थे। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष के रूप में भी उनका योगदान अविस्मरणीय है।

इस अवसर पर सम्मेलन की नियमित श्रृंखला ‘कथयामि कथा’ के अंतर्गत आमंत्रित कथाकार चित्तरंजन लाल भारती का अंगवस्त्र देकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम से पूर्व सम्मेलन के अर्थमंत्री कुमार अनुपम ने उनका परिचय प्रस्तुत किया।

एकल कथा-पाठ में चित्तरंजन लाल भारती ने ‘अच्छा कौन’, ‘आम जनता के लिए’, ‘पीछा करती दृष्टि’, ‘सृष्टि’, ‘ज़्यादा ज़रूरी’ और ‘हाँ, ठीक है’ शीर्षक से छह लघुकथाओं का प्रभावशाली पाठ किया। इन रचनाओं पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रत्नेश्वर सिंह, विभारानी श्रीवास्तव और सागरिका राय ने समीक्षात्मक टिप्पणी प्रस्तुत की।

लघुकथा-गोष्ठी में विभारानी श्रीवास्तव ने ‘धुँधली दृष्टि’, डॉ. पुष्पा जमुआर ने ‘अहसास जी उठा’, सागरिका राय ने ‘लक्ष्मी’, ईं. अशोक कुमार ने ‘बुढ़ापे का सहारा’, शमा कौसर ‘शमा’ ने ‘मापदण्ड’, सूर्य प्रकाश उपाध्याय ने ‘थाती’, बी.के. बिहारी ने ‘अंतर की यात्रा’ तथा इन्दु भूषण सहाय ने ‘महल उदास’ शीर्षक से अपनी-अपनी लघुकथाओं का पाठ किया।

कार्यक्रम में भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी बच्चा ठाकुर, डॉ. मनोज गोवर्धनपुरी, पं. गणेश झा और चंदा मिश्र ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मंच संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने किया।

इस अवसर पर आमंत्रित कथाकार चित्तरंजन लाल भारती की पत्नी कुमारी क्रांति सहित गोविन्द प्रसाद जायसवाल, नरेश कुमार, चन्द्रभूषण कुमार, प्रेम प्रकाश, अशोक कुमार, नीतीश कुमार, अमन वर्मा, नन्दन कुमार मीत, भास्कर त्रिपाठी एवं बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।