वैशाली: वैशाली समाहरणालय परिसर में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अनुमंडल कार्यालय में तैनात एक लिपिक को दो हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी लिपिक पर पीडीएस लाइसेंस बहाली की फाइल आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद समाहरणालय परिसर में हड़कंप मच गया।
फाइल आगे बढ़ाने के लिए मांगी थी घूस
जानकारी के अनुसार, लालगंज प्रखंड के लक्ष्मीनारायणपुर निवासी पीडीएस दुकानदार किशन कुमार का लाइसेंस अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) द्वारा निलंबित कर दिया गया था। इसके खिलाफ उन्होंने जिला पदाधिकारी की अदालत में अपील की थी। सुनवाई के बाद जिला पदाधिकारी ने लाइसेंस बहाल करने का आदेश दिया।
आरोप है कि आदेश जारी होने के बावजूद अनुमंडल कार्यालय में तैनात लिपिक सुमन सौरभ ने बहाली की फाइल आगे बढ़ाने के एवज में दो हजार रुपये की रिश्वत की मांग की।
शिकायत के बाद निगरानी ने बिछाया जाल
रिश्वत की मांग से परेशान किशन कुमार ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत का सत्यापन करने के बाद निगरानी टीम ने जाल बिछाया। मंगलवार को जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी लिपिक को दो हजार रुपये दिए, पहले से मौजूद टीम ने उसे मौके पर ही रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
पटना ले जाकर होगी आगे की कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद आरोपी लिपिक को पटना ले जाया गया, जहां उसे निगरानी की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
डीएसपी ने की कार्रवाई की पुष्टि
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीएसपी गोविंद चन्द्र माथुर ने बताया कि शिकायतकर्ता के पीडीएस लाइसेंस की बहाली का आदेश पहले ही जारी हो चुका था। इसके बावजूद फाइल पर कार्रवाई के लिए रिश्वत मांगी जा रही थी। शिकायत सही पाए जाने के बाद विशेष धावा दल का गठन किया गया और आरोपी को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया।
भ्रष्टाचार को लेकर उठे सवाल
इस कार्रवाई के बाद समाहरणालय परिसर में भ्रष्टाचार को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अब यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या रिश्वतखोरी का यह मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो आरोपी से पूछताछ कर मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रहा है।
