कटिहार : देश की पहचान और गौरव का प्रतीक अशोक स्तंभ जो राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक माना जाता है कटिहार शहर में पिछले 15 वर्षों से उद्घाटन की प्रतीक्षा कर रहा है। शहर के तीनगछिया स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, वर्मा रिफ्यूजी कालोनी परिसर में स्थापित यह भव्य अशोक स्तंभ आज उपेक्षा का शिकार है। रखरखाव के अभाव में इसका रंग भी उतरने लगा है।

आखिर क्यों नहीं हुआ है उद्घाटन

बताया जाता है कि वर्मा (म्यांमार) से विस्थापित होकर आए लोगों ने वर्ष 2010 में जनसहयोग से अशोक स्तंभ का निर्माण कराया था। विद्यालय के प्रधानाध्यापक दिनेश दूबे ने बताया कि स्थानीय लोगों की पहल पर स्कूल परिसर में स्तंभ स्थापित किया गया, लेकिन आज तक इसका औपचारिक उद्घाटन नहीं हो सका।

स्थानीय निवासी निरंजन पौद्दार ने बताया कि यह अशोक स्तंभ अपनी भव्यता के कारण दूर से ही ध्यान आकर्षित करता है। इसके चारों ओर पार्क का निर्माण कराया गया था तथा पानी का फाउंटेन भी लगाया गया। उनका दावा है कि बिहार में यह अपनी तरह का एकमात्र भव्य अशोक स्तंभ है।

सुशील कुमार मोदी ने करवाई थी स्थापना

बताया कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के निर्देश पर इस अशोक स्तंभ की स्थापना कराई गई थी, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद इसका उद्घाटन नहीं हो पाया। पूर्व वार्ड पार्षद राजेंद्र वर्मा, समाजसेवी मोहित वर्मा, रिंकू मंडल व ज्योति कुमारी ने कहा कि वर्मा से विस्थापित लोगों की स्मृति से जुड़े इस स्थल की बदहाल स्थिति बेहद दुखद है। यदि समय रहते संरक्षण व सौंदर्यीकरण किया जाता, तो यह स्थल शहर की पहचान बन सकता था।