सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई तथाकथित ‘Cockroach Janata Party’ अब एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। इस व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन के संस्थापक, बोस्टन-स्थित 30 वर्षीय अभिजीत दिपके को लेकर पुराने पुलिस रिकॉर्ड्स और 2019 के कश्मीर मुद्दे से जुड़े दस्तावेज फिर से इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर सामने आए दावों के मुताबिक, दिपके पर अतीत में भारत-विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देने और कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के एजेंडे से जुड़े होने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। हालांकि, इन आरोपों को लेकर अब तक कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
बताया जा रहा है कि हाल ही में देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) द्वारा बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से किए जाने संबंधी एक कथित बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसी मुद्दे को लेकर राजनीतिक संचार रणनीतिकार अभिजीत दिपके ने व्यंग्यात्मक अंदाज में ‘Cockroach Janata Party’ नाम से एक ऑनलाइन अभियान शुरू किया।
देखते ही देखते यह ट्रेंड सोशल मीडिया पर छा गया। ‘मैं भी Cockroach’ जैसे हैशटैग वायरल होने लगे और फ्रांज काफ्का की प्रसिद्ध पुस्तक Metamorphosis से जुड़े मीम्स इंटरनेट पर फैल गए। दावा किया जा रहा है कि महज 96 घंटों में इस अभियान के इंस्टाग्राम पेज पर 90 लाख से अधिक फॉलोअर्स जुड़ गए। लेकिन इसी लोकप्रियता के बीच दिपके का पुराना इतिहास फिर चर्चा में आ गया।
2019 के कश्मीर पोस्ट्स पर उठे सवाल
रिपोर्ट्स के अनुसार, अगस्त 2019 में जब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया था, उस दौरान अभिजीत दिपके द्वारा किए गए कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स को लेकर पुणे पुलिस ने जांच की थी।
उस समय कुछ सामाजिक संगठनों और राजनीतिक समूहों ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया था कि दिपके की पोस्ट्स भारत की संप्रभुता के खिलाफ माहौल बना रही थीं और कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान समर्थक नैरेटिव को बढ़ावा दे रही थीं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इन आरोपों के संबंध में किसी अदालत द्वारा कोई दोषसिद्धि हुई थी या नहीं।
समर्थक बनाम आलोचक
दिपके के समर्थकों का कहना है कि वे एक पत्रकार और पीआर विशेषज्ञ हैं तथा उनकी पोस्ट्स केवल राजनीतिक व्यंग्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा हैं। उनका तर्क है कि लोकतंत्र में सरकार और संस्थाओं की आलोचना को देशद्रोह नहीं माना जाना चाहिए।
वहीं आलोचकों और कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि युवाओं के असंतोष को ‘मीम राजनीति’ के जरिए भड़काने की कोशिश की जा रही है और इसके पीछे विदेशी प्रभाव या राजनीतिक एजेंडा हो सकता है।
कौन हैं अभिजीत दिपके?
पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद अभिजीत दिपके अमेरिका चले गए थे। जानकारी के मुताबिक, उन्होंने हाल ही में बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (Public Relations) में मास्टर डिग्री पूरी की है।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी और कूटनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेशी फंडिंग या देशद्रोह जैसे गंभीर आरोपों पर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुख्ता सबूत, आधिकारिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया बेहद जरूरी होती है।
फिलहाल, ‘Cockroach Janata Party’ को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज है। कुछ लोग इसे युवाओं की नाराजगी का रचनात्मक व्यंग्य मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे सुनियोजित डिजिटल राजनीतिक अभियान के रूप में देख रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह वायरल आंदोलन सिर्फ एक इंटरनेट मीम साबित होगा या इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति सामने आएगी।
