नई दिल्ली : नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम विश्व स्तरीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इसमें दुनियाभर के टेक एक्सपर्ट शिरकत कर रहे हैं। इस AI सम्मेलन में ग्रेटर नोएडा स्थित Galgotias University ग्लोबली सुर्खियां बटोरी हैं। यूनिवर्सिटी ने AI पर 350 करोड़ से अधिक खर्च का दावा करते हुए सम्मेलन में एक AI रोबोडॉग को प्रदर्शित किया था। यूनिवर्सिटी के अधिकारी ने उस AI रोबोडॉग का नाम ओरियन बताया है और दावा किया कि उसे यूनिवर्सिटी ने विकसित किया है। हालांकि साेशल मीडिया में हुई पड़ताल में सामने आया कि इस AI रोबोडॉग को चीन की एक कंपनी ने निर्मित किया। इस मामले में हुई फजीहत के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपनी गलती मान ली है, लेकिन इसके बाद से गलगोटिया यूनिवर्सिटी अपने AI इंफास्ट्रक्चर को लेकर देश-दुनिया के अंदर चर्चा में हैं। ऐसे में लोग जानना चाहते हैं कि इस यूनिवर्सिटी के मालिक कौन हैं और उन्होंने इतना बड़ा साम्राज्य कैसे बनाया।

कौन हैं Galgotias University के मालिक?

Sunil Galgotia गलगोटिया यूनिवर्सिटी के संस्थापक हैं। उन्होंने साल 2011 में ग्रेटर नोएडा में इस यूनिवर्सिटी की शुरुआत की थी। पहले वह एक पब्लिशर थे, लेकिन बाद में एजुकेशन सेक्टर में कदम रखकर बड़ा नाम बना लिया। उनका गलगोटिया एजुकेशन ग्रुप आज देश के बड़े शिक्षा समूहों में गिना जाता है।

एक छोटी किताबों की दुकान से शुरुआत

गलगोटिया परिवार की शुरुआत बहुत साधारण थी। साल 1930 में दिल्ली के कनॉट प्लेस में परिवार की एक छोटी किताबों की दुकान थी जिसका नाम ED Galgotia & Sons था। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यही परिवार आगे चलकर शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा साम्राज्य खड़ा करेगा।

अरबों की संपत्ति कैसे बनाई?

साल 2000 के आसपास सुनील गलगोटिया ने शिक्षा के क्षेत्र में एंट्री की। धीरे-धीरे उन्होंने कॉलेज और यूनिवर्सिटी शुरू कीं और आज मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी संपत्ति लगभग 3000 करोड़ रुपये बताई जाती है।

अब कौन संभाल रहा है यूनिवर्सिटी?

आज यूनिवर्सिटी की जिम्मेदारी उनके बेटे Dhruv Galgotia के पास है, जो यूनिवर्सिटी को आगे बढ़ाने और इनोवेशन पर काम कर रहे हैं।
वहीं Aradhana Galgotia यूनिवर्सिटी में डायरेक्टर की भूमिका निभा रही हैं।

कितने छात्र पढ़ते हैं यहां?

2011 में शुरू हुई यह यूनिवर्सिटी आज काफी बड़ी बन चुकी है। यहां 40 से अधिक देशों के छात्र यहां पढ़ने आते हैं। 40,000 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं।