पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को लेकर एक बार फिर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच उनके बेटे निशांत कुमार ने अपने पिता से मुलाकात की और उन्हें मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ मंदिर तथा सीतामढ़ी के पुनौरा धाम से लाया गया प्रसाद भेंट किया। निशांत ने मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की है, जिसमें वह अपने पिता नीतीश कुमार को प्रसाद देते नजर आ रहे हैं।

निशांत कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि सीतामढ़ी का दो दिवसीय दौरा पूरा करने के बाद उन्होंने अपने पिता से मुलाकात कर बाबा गरीबनाथ मंदिर और माता जानकी मंदिर, पुनौरा धाम में दर्शन-पूजन का प्रसाद दिया। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें पिता का स्नेह और आशीर्वाद मिला तथा उनका मार्गदर्शन जनसेवा के रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
सीतामढ़ी दौरे में मंदिर से लेकर अस्पताल तक पहुंचे निशांत
निशांत कुमार के दो दिवसीय सीतामढ़ी दौरे के दौरान धार्मिक और प्रशासनिक, दोनों तरह के कार्यक्रम देखने को मिले। उन्होंने पुनौरा धाम पहुंचकर माता जानकी मंदिर में दर्शन-पूजन किया और राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके अलावा मुजफ्फरपुर स्थित बाबा गरीबनाथ मंदिर में भी उन्होंने पूजा-अर्चना की।
दौरे के दौरान निशांत कुमार देर रात सीतामढ़ी सदर अस्पताल भी पहुंचे और वहां स्वास्थ्य सेवाओं का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल की साफ-सफाई, पानी की व्यवस्था, मरीजों को मिल रही सुविधाओं और डॉक्टरों-कर्मचारियों की मौजूदगी का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान जहां व्यवस्थाओं में कमी मिली, वहां अधिकारियों को आवश्यक सुधार और कार्रवाई के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करने की बात कही।
कार्यकर्ताओं और नेताओं से भी की मुलाकात
सीतामढ़ी प्रवास के दौरान निशांत कुमार ने स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने जनकल्याणकारी योजनाओं और आम लोगों से जुड़े कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया। निशांत की सक्रियता ऐसे समय में बढ़ी है, जब बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत और भविष्य के नेतृत्व को लेकर लगातार चर्चा चल रही है।
नीतीश की विरासत पर क्यों बढ़ी सियासी हलचल?
नीतीश कुमार लंबे समय से परिवारवाद की राजनीति से दूरी बनाने की बात करते रहे हैं। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है। दूसरी ओर, उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक सक्रियता लगातार चर्चा का विषय बन रही है।
नीतीश कुमार के करीबी नेताओं की ओर से समय-समय पर निशांत को लेकर बयान सामने आते रहे हैं। ऐसे में पिता से उनकी मुलाकात और राजनीतिक-सामाजिक गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी को बिहार की सियासत में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है।
उपेंद्र कुशवाहा ने भी ठोका विरासत पर दावा
इसी बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बयान ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। कुशवाहा ने दावा किया है कि बिहार की जनता चाहती है कि नीतीश कुमार के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को संभालने की जिम्मेदारी आरएलएम को दी जाए।
कुशवाहा के इस बयान को जेडीयू की राजनीति और नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी को लेकर चल रही बहस से जोड़कर देखा जा रहा है। बिहार में पहले भी कई बड़े नेताओं की राजनीतिक विरासत उनके परिवार के सदस्यों ने संभाली है, लेकिन नीतीश कुमार ने अब तक अपने उत्तराधिकारी के तौर पर किसी एक नाम का औपचारिक ऐलान नहीं किया है।
पिता-पुत्र की मुलाकात ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चाएं
निशांत कुमार का अपने पिता से मिलना भले ही पारिवारिक और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा सामान्य घटनाक्रम हो, लेकिन बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इसकी सियासी व्याख्या भी शुरू हो गई है। एक तरफ निशांत कुमार की राजनीतिक सक्रियता बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेता नीतीश कुमार की विरासत पर अपना दावा पेश कर रहे हैं। ऐसे में बाबा गरीबनाथ और पुनौरा धाम का प्रसाद लेकर पिता नीतीश कुमार से निशांत की मुलाकात ने बिहार की राजनीति में विरासत की बहस को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।
अब सवाल यही है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत आखिर किसके हाथ जाएगी, निशांत कुमार, जेडीयू के किसी वरिष्ठ नेता या फिर कोई नया सियासी चेहरा? आने वाले दिनों में इस सवाल का जवाब बिहार की राजनीति की दिशा तय करने में अहम हो सकता है।
