पटना : बिहार सरकार किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध कराने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को और मजबूत करने जा रही है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को रसायन भवन, पटना स्थित गुण नियंत्रण एवं बीज विश्लेषण प्रयोगशाला का निरीक्षण करते हुए स्पष्ट कहा कि कृषि उपादानों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 में अमानक पाए जाने वाले कृषि उपादानों के निर्माता और विक्रेताओं के खिलाफ विधिसम्मत एवं कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली, आधुनिक उपकरणों, मानव संसाधन, परीक्षण क्षमता और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी नमूनों की जांच पूरी पारदर्शिता, वैज्ञानिक मानकों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप की जाए।

प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण पर जोर

कृषि मंत्री ने प्रयोगशालाओं में अत्याधुनिक मशीनों और आधुनिक तकनीक की उपलब्धता बढ़ाने के लिए तकनीकी उन्नयन का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने जैव उत्प्रेरक (Biostimulant) परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना, उपकरण और विशेषज्ञ मानव संसाधन का प्रस्ताव शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा। जरूरत पड़ने पर कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों की सेवाएं लेने की भी बात कही गई।

खरीफ सीजन में 20 हजार बीज नमूनों की जांच का लक्ष्य

मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के खरीफ मौसम के लिए 20,000 बीज नमूनों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक 11,236 बीज नमूनों की जांच की जा चुकी है, जिनमें 162 नमूने अमानक पाए गए हैं। ऐसे बीजों की बिक्री पर रोक लगाने के साथ संबंधित संस्थानों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

उर्वरक और कीटनाशकों की जांच में तेजी लाने के निर्देश

समीक्षा बैठक में कार्बनिक, जैव एवं अकार्बनिक उर्वरकों के साथ-साथ कीटनाशी और जैव कीटनाशी नमूनों की जांच की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी नमूनों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए तथा अमानक पाए जाने वाले उत्पादों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। जिन जिलों से अपेक्षाकृत कम नमूने जांच के लिए भेजे जा रहे हैं, वहां की भी समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

तीन महीने में दिखना चाहिए सुधार

विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों से कहा कि प्रयोगशालाओं की नियमित मासिक समीक्षा की जाए और अगले तीन महीनों में उनकी कार्यक्षमता, गुणवत्ता और परीक्षण प्रणाली में स्पष्ट सुधार दिखाई देना चाहिए। उन्होंने गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने तथा किसानों के हितों की रक्षा के लिए सख्त निगरानी जारी रखने पर जोर दिया।

प्राकृतिक खेती और अनुसंधान पर विशेष बल

कृषि मंत्री ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश देते हुए कहा कि इससे खेती की लागत कम होगी, पर्यावरण संरक्षण होगा और किसानों की आय बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि बदलते कृषि परिदृश्य में अब “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान” के साथ “जय अनुसंधान” को भी अपनाने की आवश्यकता है। उनके अनुसार गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान ही बेहतर बीज, उर्वरक और नई तकनीकों के विकास का आधार है, जिससे किसानों की समृद्धि और विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।