रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक (पीटी) परीक्षा में OMR शीट से जुड़ी कथित गड़बड़ी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। मामले की जांच कर रही CID को अब तक कई अहम सबूत मिले हैं, जिसके बाद परीक्षा रद्द किए जाने की संभावना प्रबल मानी जा रही है। इसी सिलसिले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से शुक्रवार (31 जुलाई) को लगातार तीसरे दिन करीब नौ घंटे तक पूछताछ की गई। पूछताछ के बाद उन्हें देर शाम घर जाने की अनुमति दी गई।

CID सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार अभ्यर्थी सुमन सौरभ के कबूलनामे ने जांच को नया मोड़ दिया है। सौरभ ने स्वीकार किया कि उसने परीक्षा में केवल 48 प्रश्नों के उत्तर दिए थे, इसके बावजूद उसे सफल घोषित कर दिया गया। जांच में उसकी OMR शीट भी रिकॉर्ड में उपलब्ध दस्तावेजों से मेल नहीं खाई, जिससे परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पूछताछ के दौरान CID अधिकारियों ने पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा संचालन, चयन प्रक्रिया और निजी एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) की भूमिका को लेकर कई सवाल किए। अधिकारियों ने यह जानने की कोशिश की कि OMR शीट निजी एजेंसी के कार्यालय तक कैसे पहुंची, उसमें कथित गड़बड़ी कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। हालांकि, जांच एजेंसी के अनुसार खियांग्ते इन सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।

जांच के दौरान CID ने JPSC कार्यालय के साथ-साथ परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी TDPL के कार्यालय में भी तलाशी ली थी। इस दौरान कई OMR शीट बरामद की गईं, जिन्हें अब जांच का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। वहीं, अभ्यर्थियों को नोटिस जारी किए जाने के बाद बड़ी संख्या में OMR शीट की कार्बन कॉपी भी CID को मिल रही है, जिनकी जांच में कई अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।

मामले में तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज तिवारी, तकनीकी प्रोग्रामर मो. उस्मान, मो. एजाद और अन्य कर्मियों से पूछताछ के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है। बाद में CID ने इनकी रिमांड भी बढ़ाई और पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के सामने बैठाकर आमने-सामने पूछताछ की।

गौरतलब है कि JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 19 अप्रैल 2026 को राज्य के 564 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी। दो जुलाई को जारी परिणाम में 2204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया था। मुख्य परीक्षा 25 से 27 जुलाई के बीच प्रस्तावित थी, लेकिन जांच के चलते उसे पहले ही स्थगित कर दिया गया है।

अब तक सामने आए तथ्यों और जांच की प्रगति को देखते हुए परीक्षा रद्द किए जाने की संभावना लगातार मजबूत होती जा रही है। हालांकि, अंतिम निर्णय CID की जांच रिपोर्ट और सरकार तथा आयोग के अगले कदम पर निर्भर करेगा।