सहरसा :  सहरसा सदर अस्पताल में मिड-डे-मील खाने से बीमार बच्चों के इलाज के दौरान चिकित्सकों और पत्रकारों के बीच हुए विवाद को लेकर अस्पताल प्रशासन ने अपना पक्ष सामने रखा है। अस्पताल प्रशासन ने आरोप लगाया है कि बच्चों के उपचार के दौरान कुछ पत्रकारों द्वारा बिना पूर्व अनुमति मरीजों और उनके परिजनों से बयान लेने का प्रयास किया गया, जिससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी।

सदर अस्पताल के अधीक्षक के अनुसार, कहरा प्रखंड में मिड-डे-मील खाने के बाद बीमार हुए बच्चों को इलाज के लिए सहरसा सदर अस्पताल लाया गया था। अस्पताल के चिकित्सक बच्चों का उपचार कर रहे थे और उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय सलाह दी जा रही थी। इसी दौरान विभिन्न मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकार अस्पताल पहुंचे और बच्चों एवं उनके परिजनों से बातचीत कर बयान लेने का प्रयास करने लगे।

इलाज में बाधा न हो, इसलिए पत्रकारों से बाहर जाने का किया गया अनुरोध

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि आपातकालीन वार्ड में बच्चों के इलाज को देखते हुए प्रभारी अधीक्षक और अन्य चिकित्सकों ने पत्रकारों से वार्ड के बाहर जाने का अनुरोध किया, ताकि चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को इलाज में किसी प्रकार की परेशानी न हो। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, अनुरोध के बावजूद कुछ पत्रकारों के वार्ड से बाहर नहीं जाने पर स्थिति विवाद में बदल गई। अस्पताल प्रशासन ने आरोप लगाया कि इसी दौरान अभिषेक कुमार द्वारा प्रभारी अधीक्षक से कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। साथ ही प्रभारी अधीक्षक, चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार एवं गाली-गलौज किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

आपातकालीन वार्ड के दरवाजे और शीशे को नुकसान पहुंचाने का आरोप

अस्पताल प्रशासन ने आगे बताया कि विवाद के दौरान आपातकालीन वार्ड से बाहर निकलने के क्रम में वार्ड के दरवाजे और शीशे को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। प्रशासन के आवेदन में इस घटना में चेतन कुमार नामक पत्रकार के शामिल होने की बात भी कही गई है।

घटना के दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों और भर्ती मरीजों के बीच अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, विवाद के दौरान मारपीट की स्थिति भी बनी, जिसमें कई स्वास्थ्यकर्मियों के घायल होने की बात कही गई है।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाली स्थिति

घटना की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन की ओर से स्थानीय थाना और जिला पदाधिकारी, सहरसा को दूरभाष के माध्यम से सूचना दी गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस बल सदर अस्पताल पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया।

अस्पताल प्रशासन ने बताया कि घटना को लेकर संबंधित पत्रकारों के विरुद्ध सरकारी कार्य में बाधा डालने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा प्रभारी अधीक्षक के साथ कथित गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार के आरोप में सदर थाना के थानाध्यक्ष को आवेदन दिया गया है। आवेदन के माध्यम से मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

बता दे कि यह खबर अस्पताल प्रशासन की ओर से दिए गए पक्ष और आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पत्रकारों का पक्ष इस विवरण में शामिल नहीं है।