पटना: बिहार में नदियों के पुनर्जीवन, बाढ़ नियंत्रण और सड़क निर्माण को नई गति देने के लिए केंद्र सरकार और बिहार सरकार के बीच ‘नदी संजीवनी’ कार्यक्रम के तहत ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में हुए इस समझौते का उद्देश्य नदियों से वैज्ञानिक तरीके से गाद (सिल्ट) निकालना और उसका उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों सहित अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं में करना है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य है, जिसने जलस्रोत पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन के लिए अपनी अलग नीति-2026 लागू की है। यह पहल राज्य की प्राकृतिक चुनौतियों को विकास के अवसर में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
गाद से बनेंगी सड़कें, नदियों का होगा पुनर्जीवन
समझौते के तहत नदियों से निकाली गई गाद को सड़क निर्माण की वैकल्पिक सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। NHAI की जरूरत के अनुसार बिहार सरकार नियमानुसार खनन लाइसेंस उपलब्ध कराने में सहयोग करेगी। इस MoU के तहत 243 लाख क्यूबिक मीटर गाद का उपयोग 16 चालू राजमार्ग परियोजनाओं में किया जाएगा। इससे प्राकृतिक ऊपरी मिट्टी के दोहन में कमी आएगी और नदियों की जलधारण तथा जलप्रवाह क्षमता में सुधार होगा। साथ ही जलस्रोतों के पुनर्जीवन, किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने और बाढ़ के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी। सरकार के अनुसार, इस परियोजना से बिहार पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।
58 हजार करोड़ की परियोजनाएं निर्माणाधीन

बिहार में वर्तमान में 58,340 करोड़ रुपये के निवेश से NHAI की 39 परियोजनाएं, कुल 1,561 किलोमीटर लंबाई में निर्माणाधीन हैं। वहीं, 1,85,200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 1,982 किलोमीटर लंबाई की 11 नई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। राज्य में क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने के लिए विभिन्न नदियों पर 29 नए पुलों का निर्माण भी जारी है। नदी से प्राप्त गाद का उपयोग इन परियोजनाओं और अन्य सड़क निर्माण कार्यों में किया जाएगा।
बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल में भारी बारिश और दूसरे राज्यों से आने वाले पानी के कारण बिहार को हर साल बाढ़ की समस्या का सामना करना पड़ता है। गंगा नदी में गाद जमा होने की समस्या भी गंभीर है। नदियों से गाद हटाने और जलस्रोतों के पुनर्जीवन से बाढ़ के प्रभाव को कम करने तथा जल प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि बिहार बांग्लादेश को पानी दिए जाने का विरोधी नहीं है, लेकिन राज्य की कृषि, उद्योग और पेयजल संबंधी जरूरतों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने गंगा नदी के दोनों किनारों पर फोरलेन सड़क निर्माण कराने का आग्रह भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से किया।
12 नए टाउनशिप, 10 एयरपोर्ट और 32 मेडिकल कॉलेज
मुख्यमंत्री के अनुसार, बिहार में लगभग 80 हजार एकड़ भूमि पर 12 नए टाउनशिप विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। इनमें पटना का पाटलिपुत्र, गया का मगध, मुंगेर का अंग, भागलपुर का विक्रमशिला, सहरसा का कोसी, दरभंगा का मिथिला, मुजफ्फरपुर का तिरहुत और सीतापुरम जैसे प्रस्तावित विकास क्षेत्र शामिल हैं।
इसके अलावा राज्य में 10 नए एयरपोर्ट और 32 नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण की दिशा में भी तेजी से काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों से निकाली गई गाद इन विकास परियोजनाओं में उपयोगी संसाधन साबित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि गाद निकासी के बाद लगभग एक लाख एकड़ नई भूमि उपलब्ध होने की संभावना है, जिससे गंगा किनारे आधुनिक आवासीय क्षेत्रों के विकास का अवसर मिलेगा।
महाराष्ट्र के बुलढाणा मॉडल पर होगा काम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि बिहार में महाराष्ट्र के सफल बुलढाणा मॉडल की तर्ज पर नदियों से गाद हटाने का कार्य किया जाएगा। इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और निकाली गई गाद का उपयोग सड़क निर्माण में किया जा सकेगा। ‘नदी संजीवनी’ कार्यक्रम के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और आधारभूत संरचना विकास को एक साथ आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से बिहार विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
इस अवसर पर बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर, NHAI अध्यक्ष संतोष कुमार यादव, पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल सहित केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
