2006 से 2023 के बीच बिहार का मानव विकास सूचकांक (HDI) 0.485 से बढ़कर 0.614 हुआ, जो 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह सुधार राष्ट्रीय औसत वृद्धि दर से अधिक है और राज्य की सामाजिक प्रगति का प्रमाण है।
बहुआयामी गरीबी में देश की सबसे बड़ी कमी
नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के अनुसार 2015-16 से 2019-21 के बीच बिहार में गरीबी 51.89 प्रतिशत से घटकर 33.76 प्रतिशत रह गई। 18.13 प्रतिशत अंकों की यह कमी देश में सबसे अधिक है।
20 वर्षों में प्रति व्यक्ति आय 13 गुना बढ़ी
वर्ष 2004 में ₹5,780 रही बिहार की प्रति व्यक्ति आय 2024-25 में बढ़कर ₹76,490 हो गई। राज्य ने इस अवधि में लगभग 13 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर दर्ज कर आर्थिक विकास का नया अध्याय लिखा है।
स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण में उल्लेखनीय उपलब्धियां
संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 19.9 से बढ़कर 81.1 प्रतिशत हुआ, जबकि जीवन प्रत्याशा 64.2 वर्ष से बढ़कर 69.5 वर्ष हो गई। बच्चों में ठिगनापन, कम वजन और क्षीणता जैसे पोषण संकेतकों में भी राष्ट्रीय औसत से बेहतर सुधार दर्ज किया गया।
SDG लक्ष्यों और रोजगार के क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन
PLFS 2024 के अनुसार बिहार की बेरोजगारी दर 3 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत से कम है। वहीं स्वच्छ जल एवं स्वच्छता (SDG-6) में बिहार देश में तीसरे स्थान पर रहा और स्वास्थ्य एवं कल्याण (SDG-3) में ‘फ्रंट रनर’ श्रेणी में पहुंच गया।
मानव विकास, गरीबी उन्मूलन, आर्थिक वृद्धि, स्वास्थ्य, शिक्षा और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में बिहार की उपलब्धियां यह दर्शाती हैं कि राज्य विकसित बिहार के संकल्प को मजबूत आधार प्रदान करते हुए देश के अग्रणी विकासशील राज्यों में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।
