पटना : बिहार में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। राज्य सरकार खेती से लेकर एसेंशियल ऑयल (आवश्यक तेल) के उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता जांच, पैकेजिंग और विपणन तक एक समेकित व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और कृषि आधारित उद्योगों के विकास को भी गति मिलेगी।

बुधवार को पटना के मीठापुर स्थित कृषि भवन में औषधीय एवं सुगंधित पौधों के क्षेत्र विस्तार तथा मूल्य संवर्धन को लेकर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में विविधीकरण समय की जरूरत है और बिहार की कृषि-जलवायु परिस्थितियां तुलसी, लेमनग्रास सहित कई औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के लिए अनुकूल हैं।
वैज्ञानिक खेती से बढ़ेगी किसानों की आमदनी
कृषि मंत्री ने कहा कि औषधीय एवं सुगंधित पौधों की वैज्ञानिक और बाजार की मांग के अनुरूप खेती करने से किसानों की आय में वृद्धि की व्यापक संभावनाएं हैं। इसके लिए किसानों को गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, उन्नत किस्में और आधुनिक कृषि तकनीक उपलब्ध कराने की जरूरत है। साथ ही, उत्पादन क्षेत्रों के नजदीक आसवन एवं प्रसंस्करण केंद्र विकसित करना भी जरूरी है, ताकि पौधों से तेल निकालने और उसके प्रसंस्करण में किसानों को सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि बिहार में लगभग 94 से 96 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत श्रेणी के हैं। ऐसे किसानों के लिए सीमित जमीन से अधिक आमदनी प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। औषधीय खेती को बढ़ावा मिलने से किसानों की आय बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और कृषि आधारित उद्यमिता के नए अवसर पैदा होंगे।
उत्पादन से लेकर विपणन तक किसानों की भागीदारी
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि किसानों को केवल खेती और उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें आसवन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण, मानकीकरण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन की प्रक्रिया से भी जोड़ना होगा। इससे कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन होगा और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि एसेंशियल ऑयल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रयोगशालाओं, गुणवत्ता मानकों और बाजार संपर्क को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। कार्यशाला में मिले सुझावों के आधार पर उपयुक्त फसलों की पहचान, उत्पादन क्लस्टरों का विकास, किसान प्रशिक्षण और प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार की रणनीति तैयार की जाएगी।
किसानों और उद्योग के बीच मजबूत होगा संपर्क
कार्यशाला में उद्यान निदेशक अभिषेक कुमार ने कहा कि बिहार में औषधीय एवं सुगंधित पौधों और उनसे तैयार होने वाले तेल के उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं, लेकिन किसानों को अभी उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। किसानों और उद्योगों के बीच बिचौलियों की कई कड़ियां होने के कारण उन्हें बाजार की मांग और गुणवत्ता मानकों की पर्याप्त जानकारी भी नहीं मिलती है। उन्होंने कहा कि एसेंशियल ऑयल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों के साथ संवाद से किसानों को उद्योग की जरूरतों, गुणवत्ता मानकों और बाजार की मांग को समझने में मदद मिलेगी। इससे उन्हें गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, प्रशिक्षण और निर्यात से संबंधित जानकारी भी प्राप्त हो सकेगी।
कृषि वैज्ञानिकों और किसानों ने लिया हिस्सा
कार्यशाला में विभाग के विशेष सचिव डॉ. बीरेंद्र प्रसाद यादव, एसेंशियल ऑयल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं महासचिव, विभागीय वरीय पदाधिकारी, सभी जिलों के उद्यान पदाधिकारी और औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती करने वाले किसान शामिल हुए। प्रत्येक जिले से तीन किसानों को आमंत्रित किया गया था।
इसके अलावा डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, बिहार कृषि विश्वविद्यालय तथा इस्लामपुर स्थित औषधीय एवं सुगंधित पौधों से संबंधित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के कृषि वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे।
राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को किसानों के लिए आय का एक बेहतर विकल्प बनाना, कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करना और बिहार में उत्पादन से लेकर बाजार तक की पूरी व्यवस्था को मजबूत करना है।
