पटना: राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएफटी) पटना में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 के उपलक्ष्य में 3 अगस्त से 21 अगस्त 2026 तक पखवाड़ा भर विभिन्न शैक्षणिक, रचनात्मक और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों को भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा से जोड़ना तथा स्वदेशी हथकरघा उत्पादों के महत्व के प्रति जागरूक करना है।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर संस्थान परिवार के सभी विद्यार्थियों, फैकल्टी और कर्मचारियों से 7 अगस्त को हथकरघा से बने परिधान पहनकर इस दिवस को मनाने का आग्रह किया गया। साथ ही, पूरे आयोजन के दौरान संस्थान के सेंट्रल हॉल में विशेष ‘हैंडलूम सेल्फी बूथ’ स्थापित किया गया है, जहां प्रतिभागी हथकरघा परिधानों के साथ अपनी तस्वीरें लेकर इस अभियान का हिस्सा बन सकते हैं।

एनआईएफटी पटना के निदेशक कर्नल राहुल शर्मा ने कहा कि भारत का हथकरघा क्षेत्र देश की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्प कौशल और सतत विकास का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संस्थान युवा डिज़ाइनरों को भारतीय वस्त्र परंपरा से जोड़ने, हस्तकरघा उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और पारंपरिक शिल्प को आधुनिक डिज़ाइन के साथ जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उनके अनुसार, ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने के साथ-साथ उन्हें नवाचार के जरिए इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगे।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह के अंतर्गत 3 से 21 अगस्त तक सेंट्रल हॉल में हैंडलूम सेल्फी बूथ संचालित रहेगा। 7 अगस्त को संस्थान के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हथकरघा जागरूकता से जुड़ी विशेष रील्स जारी की जाएंगी। वहीं 18 अगस्त को फाउंडेशन प्रोग्राम के विद्यार्थियों के लिए पोस्टर पेंटिंग और फेस पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित होगी, जबकि 19 अगस्त को विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों के लिए हथकरघा विषयक क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।

कार्यक्रम का समापन 21 अगस्त 2026 को एनआईएफटी पटना परिसर में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह के साथ होगा। इस अवसर पर दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना, निदेशक का संबोधन, हेरिटेज वॉक तथा धन्यवाद ज्ञापन सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

एनआईएफटी पटना का यह आयोजन भारतीय हथकरघा परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही यह नई पीढ़ी को भारतीय वस्त्र संस्कृति से जोड़ने और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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