नई दिल्ली: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) में बड़े पैमाने पर हो रहे फर्जीवाड़े का खुलासा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग तकनीक की मदद से हुआ है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने जांच में 655.04 करोड़ रुपये के संदिग्ध और फर्जी क्लेम का पता लगाया है। इस मामले में 2021 अस्पतालों को पैनल से बाहर (De-empanelled) किया गया है, जबकि 590 अस्पतालों को निलंबित किया गया और 26 मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके अलावा 263.71 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

फर्जी मेडिकल रिपोर्ट से किया जा रहा था क्लेम

जांच में सामने आया कि कई अस्पताल एक्स-रे, ब्लड टेस्ट, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी रिपोर्टों में हेरफेर कर अलग-अलग मरीजों के नाम पर क्लेम दाखिल कर रहे थे। कई मामलों में एक ही मेडिकल दस्तावेज को अलग-अलग मरीजों और अस्पतालों के लिए इस्तेमाल किया गया।

AI आधारित इमेज एनालिटिक्स सिस्टम ने ऐसे मामले पकड़े, जिनमें एक ही एक्स-रे फिल्म को तीन अलग-अलग मरीजों के इलाज के दावे में लगाया गया था। अस्पतालों ने केवल मरीज का नाम, आईडी और तारीख बदलकर दस्तावेज जमा किए थे।

इम्प्लांट और सर्जरी रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी

मशीन लर्निंग आधारित विश्लेषण में घुटना प्रत्यारोपण (Knee Replacement) से जुड़े कई संदिग्ध मामले सामने आए। जांच में पाया गया कि एक ही इम्प्लांट बारकोड और विवरण का उपयोग अलग-अलग अस्पतालों के क्लेम में किया गया था, जिससे रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका जताई गई।

सोशल नेटवर्क एनालिसिस से पकड़ा गया संगठित खेल

AI ने सोशल नेटवर्क एनालिसिस के जरिए ऐसे नेटवर्क भी चिन्हित किए, जहां एक ही व्यक्ति के माध्यम से 20 से अधिक लाभार्थी कार्ड बनाए गए। सभी मरीजों को एक ही अस्पताल में एक ही दिन भर्ती दिखाया गया और उसी दिन एंजियोप्लास्टी किए जाने का दावा भी किया गया।

लैब रिपोर्टों की भी हो रही जांच

ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) और डीप लर्निंग तकनीक की मदद से लैब रिपोर्टों की जांच की जा रही है। कई मामलों में मरीजों की रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद गंभीर संक्रमण दिखाकर अधिक राशि का क्लेम किया गया था।

इन तकनीकों के सहारे NHA ने रणनीति बनायी 

* फर्जीवाड़ा रोकने के लिए NHA के AI हथियार।

* फेसियल कंपैरिजन के जरिए पहचान सत्यापन।

*ऑब्जेक्ट डिटेक्शन से जरूरी दस्तावेजों की पहचान।

* इमेज डिडुप्लिकेशन से दोहराए गए दस्तावेज पकड़ना।

* फोर्ज्ड डॉक्यूमेंट सैंपलिंग।

* डॉक्यूमेंट सिमिलैरिटी एनालिसिस।

* सोशल नेटवर्क एनालिसिस से संदिग्ध नेटवर्क की पहचान।

NHA का कहना है कि AI आधारित निगरानी प्रणाली के जरिए स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाई जा रही है और फर्जी क्लेम करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।