पटना : बिहार सरकार ने जल संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए “उपचारित अपशिष्ट जल के सुरक्षित पुनः उपयोग हेतु नीति, बिहार-2026” को मंजूरी दे दी है। नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि इस नीति के लागू होने से उपचारित अपशिष्ट जल का सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से पुनः उपयोग सुनिश्चित होगा, जिससे ताजे जल पर निर्भरता कम होगी और जल संसाधनों का बेहतर संरक्षण किया जा सकेगा।
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 15 जुलाई 2026 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस नीति को स्वीकृति दी। इसका उद्देश्य जल संरक्षण को बढ़ावा देना, पर्यावरण प्रदूषण को कम करना और शहरी विकास को अधिक टिकाऊ बनाना है।
क्या है नीति का उद्देश्य?
नई नीति के तहत गैर-पेय कार्यों में ताजे पानी की जगह उपचारित अपशिष्ट जल का उपयोग किया जाएगा। इससे उद्योग, कृषि और शहरी सेवाओं के लिए वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध होंगे। साथ ही जल प्रबंधन में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा और शहरी स्थानीय निकायों के लिए राजस्व के नए अवसर भी विकसित होंगे।
इन कार्यों में होगा ट्रीटेड वॉटर का इस्तेमाल
सरकार के अनुसार उपचारित अपशिष्ट जल का उपयोग औद्योगिक कूलिंग और प्रोसेसिंग, निर्माण कार्य, पार्कों की सिंचाई, सड़कों की सफाई, अग्निशमन, कृषि और जलाशयों में पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखने जैसे कार्यों में किया जाएगा।
जल संरक्षण के साथ रोजगार भी बढ़ेंगे
नीतीश मिश्रा ने कहा कि इस नीति से नदियों और भूजल स्रोतों पर दबाव कम होगा, जल निकायों में प्रदूषण घटेगा और तालाबों व आर्द्रभूमियों के संरक्षण को मजबूती मिलेगी। साथ ही जल प्रबंधन और वितरण से जुड़े नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे तथा उद्योगों और नगर निकायों की जल लागत में कमी आएगी।
राजस्व बढ़ाने में भी मिलेगी मदद
सरकार शुरुआती चरण में आवश्यक अवसंरचना, वितरण प्रणाली और निगरानी तंत्र को मजबूत करेगी। दीर्घकाल में यह नीति शहरी स्थानीय निकायों के लिए राजस्व का नया स्रोत बनेगी। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संस्थागत व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।
मंत्री ने विश्वास जताया कि “उपचारित अपशिष्ट जल के सुरक्षित पुनः उपयोग हेतु नीति, बिहार-2026” राज्य को जल संरक्षण, संसाधनों के सतत उपयोग और पर्यावरणीय संतुलन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी।
