Jharkhand SIR : झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान गैर-भारतीय नागरिकों के मतदाता सूची में शामिल होने की शिकायत सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं। मामले में राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने पाकुड़ और साहिबगंज के जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्तों से रिपोर्ट तलब की है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने दोनों जिलों के अधिकारियों को पत्र भेजकर मामले की वर्तमान स्थिति और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी पांच दिनों के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
आदिवासी जमीन पर कब्जे और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप
यह मामला आदिवासी कल्याण समिति, पाकुड़ के अध्यक्ष बरसन किस्कू की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग से शिकायत करते हुए आदिवासी जमीन पर कथित अवैध कब्जे और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। शिकायत में गैर-भारतीय नागरिकों, विशेष रूप से बांग्लादेशी नागरिकों के मतदाता सूची में शामिल होने की आशंका भी जताई गई थी। इसके बाद भारत निर्वाचन आयोग ने झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था।
आठ महीने बाद भी कार्रवाई की जानकारी नहीं
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पत्र में कहा गया है कि शिकायत पर संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, करीब आठ महीने बीतने के बावजूद जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त और निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी के स्तर से की गई कार्रवाई की कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। पत्र में मामले में कथित शिथिलता पर भी सवाल उठाते हुए वर्तमान स्थिति और अब तक की कार्रवाई से मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को अवगत कराने का निर्देश दिया गया है।
फर्जी दस्तावेजों का भी शिकायत में जिक्र
शिकायत में कथित फर्जी दस्तावेजों का भी उल्लेख किया गया है। निर्वाचन आयोग ने कहा था कि भले ही शिकायत के कुछ आरोप सीधे तौर पर निर्वाचन कार्य से संबंधित नहीं हैं, लेकिन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान इनकी जांच जरूरी है।
आयोग ने संबंधित कानूनों और प्रावधानों का हवाला देते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा कि मतदाता सूची में किसी अयोग्य व्यक्ति का पंजीकरण न हो और केवल पात्र नागरिकों को ही मतदाता के रूप में शामिल किया जाए।
पाकुड़ की तीन पंचायतों में सबसे ज्यादा शिकायतें
जानकारी के अनुसार, पाकुड़ जिले की इलामी, मनिकापुर और मणिरामपुर पंचायतों में इस तरह की शिकायतें अधिक सामने आने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ मामलों में मतदाता अपनी पहचान से जुड़े दस्तावेज तो प्रस्तुत कर पा रहे हैं, लेकिन पिता या दादा से संबंधित पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। कई मामलों में केवल हाल के वर्षों के दस्तावेज होने की बात सामने आई है।
हालांकि, इन शिकायतों में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच और रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। निर्वाचन विभाग की जांच रिपोर्ट से यह पता चलेगा कि मतदाता सूची में वास्तव में कोई अयोग्य या गैर-भारतीय नागरिक शामिल है या नहीं और ऐसे मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
