भारतीय जन क्रांति दल (डेमोक्रेटिक) के राष्ट्रीय महासचिव ने सरकारी तंत्र के कथित दुरुपयोग पर जताई चिंता, कहा- “सरकार की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है, अपराध नहीं”

पटना : भारतीय जन क्रांति दल (डेमोक्रेटिक) के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. राकेश दत्त मिश्र ने विपक्षी नेताओं एवं पदाधिकारियों के खिलाफ सरकारी तंत्र के कथित दुरुपयोग की शिकायतों को गंभीर बताते हुए सरकार से पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना, उसकी नीतियों की आलोचना करना और जनता की समस्याओं को उठाना विपक्ष का संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक दायित्व है।

डॉ. मिश्र ने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए सरकारी संस्थाओं के कथित इस्तेमाल की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी विपक्षी नेता के खिलाफ आयकर विभाग, पुलिस, प्रशासन या अन्य सरकारी संस्थाओं की कार्रवाई कानून के बजाय राजनीतिक कारणों से प्रभावित होती है, तो यह लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

PAN Jurisdiction में बदलाव को लेकर उठाए सवाल

डॉ. राकेश दत्त मिश्र ने अपने व्यक्तिगत अनुभव का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने आयकर विभाग के e-Filing Portal पर अपने PAN की Jurisdiction Details देखी, जिसमें “CENT CIR 1(4), AHMEDABAD” प्रदर्शित हो रहा था।

उन्होंने कहा कि वे जन्म से पटना में रह रहे हैं और उनका गुजरात से कोई संबंध नहीं रहा है। ऐसे में PAN Jurisdiction का Ahmedabad, Gujarat प्रदर्शित होना उनके लिए आश्चर्य और चिंता का विषय है।

डॉ. मिश्र ने सवाल उठाया कि यदि संबंधित करदाता की ओर से Jurisdiction बदलने के लिए कोई आवेदन नहीं दिया गया है, तो यह परिवर्तन कब, किस आधार पर और किस अधिकारी या विभागीय प्रक्रिया के माध्यम से किया गया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में नागरिक को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।

उन्होंने आयकर विभाग से पूरे मामले में स्पष्टीकरण की मांग करते हुए पूछा : 

* PAN Jurisdiction को पटना से Ahmedabad कब बदला गया?

* Jurisdiction में बदलाव का प्रशासनिक या तकनीकी कारण क्या था?

* क्या इसके लिए कोई आवेदन या migration request प्राप्त हुई थी?

*यह परिवर्तन किस अधिकारी के आदेश अथवा किस विभागीय प्रक्रिया के तहत किया गया?

* यदि यह तकनीकी त्रुटि है तो इसे तत्काल ठीक कर नागरिक को इसकी सूचना क्यों न दी जाए?

* डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर

डॉ. मिश्र ने कहा कि डिजिटल इंडिया के दौर में नागरिकों की महत्वपूर्ण व्यक्तिगत और वित्तीय सूचनाएं सरकारी डिजिटल प्रणालियों में सुरक्षित रहती हैं। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड में बिना स्पष्ट जानकारी के बदलाव होने की स्थिति में संबंधित विभाग को पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए।

 

उन्होंने कहा, “यह केवल