ब्राह्मण कल्याण बोर्ड के गठन, सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण और संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना समेत कई मांगों को लेकर लोकमंच के बैनर तले जुटे लोग।

पटना: बिहार की राजधानी पटना में सोमवार को ब्राह्मण समाज के हजारों लोगों ने अपनी 15 सूत्री मांगों को लेकर मौन जुलूस निकाला। माथे पर लाल पाग पहने प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे 10 हजार से अधिक लोगों ने लोकमंच के बैनर तले एकजुटता प्रदर्शित की। इनकम टैक्स चौराहे से सप्तमूर्ति तक निकाले गए इस जुलूस से पहले मिलर स्कूल मैदान में सभा का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के आयोजकों ने इसे समाज के अधिकार, सम्मान और कल्याण से जुड़ा आंदोलन बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति का विरोध करना नहीं, बल्कि अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना है।

समाज के अधिकारों के लिए एकजुट हुए ब्राह्मण

लोकमंच के संस्थापक आशीष कुमार उर्फ बबलू झा ने कहा कि ब्राह्मण समाज की वर्तमान सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति को लेकर युवाओं में चिंता है। इसी कारण समाज को एक मंच पर लाकर अपनी समस्याओं और मांगों को सरकार के सामने रखने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम किसी के समर्थन या विरोध में नहीं है। समाज के हित में संवाद के माध्यम से समाधान निकालना ही इसका उद्देश्य है। ब्राह्मण कल्याण बोर्ड के गठन समेत 15 सूत्री मांगों को लेकर लोग एकजुट हुए हैं।

ब्राह्मण कल्याण बोर्ड और सर्वेक्षण की प्रमुख मांग

लोकमंच की ओर से सरकार के समक्ष कई मांगें रखी गई हैं। इनमें ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन, समाज की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का सर्वेक्षण कराकर श्वेत पत्र जारी करना प्रमुख है।

इसके अलावा भगवान परशुराम की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने, पटना में चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा स्थापित करने तथा संस्कृत विद्यालयों और महाविद्यालयों की स्थिति में सुधार की मांग की गई है। आयोजकों ने गुरुकुल परंपरा के अनुरूप वैदिक शिक्षा को बढ़ावा देने और संस्कृत शिक्षा के विकास पर भी जोर दिया।

सहरसा में मंडन मिश्र के नाम पर संस्कृत विश्वविद्यालय की मांग

आशीष कुमार ने कहा कि सहरसा में भारतीय मंडन मिश्र के नाम पर संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग लंबे समय से की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र ने इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए शिलान्यास किया था, लेकिन बाद में यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। लोकमंच की मांग है कि वर्तमान सरकार इस दिशा में पहल करे और सहरसा में मंडन मिश्र के नाम पर संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की जाए।

सरकार से उम्मीद, चुनाव पर फिलहाल चुप्पी

सरकार से अपेक्षाओं को लेकर आशीष कुमार ने कहा कि समाज चाहता है कि उसकी मांगों पर सकारात्मक पहल हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल आंदोलन का उद्देश्य राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक अधिकारों और हिस्सेदारी से जुड़ा है। आगामी चुनावों में समाज की भूमिका को लेकर उन्होंने कहा कि इस पर उचित समय आने पर समाज के लोग निर्णय लेंगे।

यूजीसी मुद्दे पर न्यायालय के फैसले का इंतजार

यूजीसी से जुड़े मुद्दे पर ब्राह्मण समाज की नाराजगी के सवाल पर आशीष कुमार ने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि न्यायालय का जो भी फैसला आएगा, समाज उसे स्वीकार करेगा।लोकमंच के इस कार्यक्रम के जरिए आयोजकों ने बिहार में ब्राह्मण समाज की मांगों को लेकर व्यापक संवाद और सरकार से सकारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा जताई।