पटना: बिहार के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) प्रशांत कुमार (पीके) शाही ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद राज्य में नए महाधिवक्ता की नियुक्ति को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। भाजपा नेतृत्व वाली नई सरकार के गठन के करीब दो महीने बाद आए इस फैसले ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
पीके शाही बिहार सरकार के सबसे वरिष्ठ विधि अधिकारियों में गिने जाते रहे हैं। उन्होंने उच्च न्यायालय समेत विभिन्न न्यायिक मंचों पर राज्य सरकार का प्रभावी पक्ष रखा और अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण संवैधानिक, प्रशासनिक और नीतिगत मामलों में सरकार का सफलतापूर्वक प्रतिनिधित्व किया।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले पीके शाही को उनकी विधिक विशेषज्ञता और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए महाधिवक्ता की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वह 13 जनवरी 2023 को तत्कालीन महाधिवक्ता ललित किशोर के इस्तीफे के बाद इस पद पर नियुक्त हुए थे।
पहले भी रह चुके हैं महाधिवक्ता
यह पहली बार नहीं था जब पीके शाही ने बिहार के महाधिवक्ता का दायित्व संभाला। इससे पहले वे वर्ष 2005 से 2010 तक भी इस महत्वपूर्ण पद पर कार्य कर चुके हैं। बाद में उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री समेत कई विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
राजनीति में भी रहा सक्रिय योगदान
पीके शाही ने वर्ष 2013 में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के उम्मीदवार के रूप में महाराजगंज लोकसभा उपचुनाव भी लड़ा था। हालांकि, उन्हें राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रत्याशी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
अब किसे मिलेगी जिम्मेदारी?
पीके शाही के इस्तीफे के बाद राज्य सरकार जल्द ही नए महाधिवक्ता की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। ऐसे में राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि बिहार सरकार अगला महाधिवक्ता किसे बनाती है।
