पटना : कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधीर सिंह के नेतृत्व में पटना उच्च न्यायालय में न्यायिक कार्यों और मामलों के निपटारे की गति में उल्लेखनीय तेजी आई है। उनके कार्यकाल के चार सप्ताह से भी कम समय में न्यायालय ने मामलों के प्रबंधन, सुनवाई की प्रक्रिया और लंबित मुकदमों के त्वरित निपटारे को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

न्यायालय के प्रदर्शन आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में कुल 15,394 मामले दर्ज किए गए, जबकि 17,107 मामलों का निपटारा हुआ। इस तरह पटना उच्च न्यायालय की केस क्लियरेंस दर (CCR) 111.13 प्रतिशत रही। निपटाए गए मामलों में करीब 3,757 दीवानी मामले शामिल हैं, जिनमें लगभग 2,850 रिट याचिकाएं थीं। वहीं, करीब 13,350 आपराधिक मामलों का निपटारा किया गया, जिनमें लगभग 12,000 जमानत याचिकाएं शामिल हैं।
जमानत मामलों की सुनवाई में तेजी
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के कार्यकाल में जमानत आवेदनों के त्वरित निपटारे पर विशेष जोर दिया गया है। दोषरहित जमानत आवेदनों को यथासंभव दाखिल किए जाने के एक दिन के भीतर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा रहा है। इससे जरूरी मामलों में न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी को कम करने में मदद मिली है।

इसके साथ ही जमानत मामलों, अवमानना मामलों (एमजेसी) और नए दायर रिट याचिकाओं की नियमित एवं व्यवस्थित सूची तैयार कर सुनवाई की जा रही है। इससे न्यायिक समय का बेहतर उपयोग और मामलों के प्रवाह को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने में सहायता मिल रही है।
न्यायिक दक्षता और समयबद्ध न्याय पर जोर
पटना हाईकोर्ट में मामलों के निपटारे की बढ़ी हुई रफ्तार को न्यायिक दक्षता और समयबद्ध न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खासकर जमानत मामलों के शीघ्र निपटारे से यह संदेश मजबूत हुआ है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और न्याय तक पहुंच के मामलों में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।

विधि समुदाय से जुड़े लोगों ने इन सुधारों को सक्रिय न्यायिक नेतृत्व और प्रभावी न्यायालय प्रशासन का परिणाम बताया है। उनका मानना है कि मामलों की प्राथमिकता तय करने, सुनवाई की बेहतर समय-सारणी और त्वरित सूचीकरण से न्यायालय की कार्यक्षमता में सुधार हुआ है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति सुधीर सिंह के कार्यकाल में न्यायिक उत्पादकता, मामलों के प्रभावी प्रबंधन और त्वरित न्याय वितरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। चार सप्ताह से भी कम समय में 111 प्रतिशत से अधिक की केस क्लियरेंस दर पटना उच्च न्यायालय में मामलों के निपटारे की गति में आए महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है।
विवेक कुमार
