पश्चिम बंगाल में नई भाजपा सरकार की ‘डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट’ नीति के तहत अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान शुरू कर दिया गया है। कार्रवाई तेज होते ही उत्तर 24 परगना जिले के बिथारी-हाकिमपुर बॉर्डर पर सैकड़ों बांग्लादेशी नागरिक अपने देश लौटने की कोशिश करते दिखाई दिए।
सीएम शुभेंदु अधिकारी की सख्त चेतावनी
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कल्याणी में आयोजित बैठक के बाद अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि अवैध रूप से रह रहे लोगों को जल्द से जल्द वापस भेजा जाए। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि “जल्दी-जल्दी भागो, नहीं तो सरकार अपना काम करेगी।”
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अवैध घुसपैठियों को अदालत भेजने की आवश्यकता नहीं है। पुलिस सीधे उन्हें बीएसएफ को सौंप सकती है, जिसके बाद भारत-बांग्लादेश समझौते के तहत उनकी पहचान सत्यापित कर वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
बॉर्डर पर उमड़ी भीड़
स्वरूपनगर क्षेत्र के पास बड़ी संख्या में बांग्लादेशी पुरुष, महिलाएं और बच्चे बॉर्डर पार करने के लिए पहुंचे। बीएसएफ जवानों ने उन्हें हिरासत में लेकर बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
कई लोगों ने स्वेच्छा से वापस लौटने का फैसला लिया। खुलना की रहने वाली तक्लीमा खातून ने बताया कि वह दो साल पहले अवैध तरीके से भारत आई थीं और घरेलू काम कर रही थीं। उन्होंने कहा कि वह “होल्डिंग सेंटर” में नहीं जाना चाहतीं, इसलिए खुद ही बांग्लादेश लौट रही हैं।
इसी तरह सतखीरा के शाहिदुल गाजी और जेसोरे के मोहम्मद अली शेख ने भी स्वीकार किया कि वे वर्षों से कोलकाता में बिना दस्तावेजों के रहकर काम कर रहे थे, लेकिन अब सरकार की कार्रवाई के डर से वापस लौट रहे हैं।
मालदा और मुर्शिदाबाद में बने होल्डिंग सेंटर
सरकार ने सोमवार को मालदा और मुर्शिदाबाद में अवैध घुसपैठियों के लिए दो नए होल्डिंग सेंटर शुरू किए हैं। पहले ही दिन 12 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को वहां भेजा गया।
बीएसएफ कर रही पहचान सत्यापन
बीएसएफ अधिकारियों के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ, फिंगरप्रिंट और फोटोग्राफ लेने के बाद बीजीबी से संपर्क किया जाता है। इसके बाद उनकी पहचान सत्यापित कर बांग्लादेश वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
सरकार का दावा – कानून पहले से मौजूद था
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह कानून पहले से लागू था, लेकिन राजनीतिक कारणों से इस पर कार्रवाई नहीं हो रही थी। उन्होंने कहा कि राज्य और देश के हित में अब कानून को सख्ती से लागू किया जा रहा है।
