पटना: पटना नगर निगम क्षेत्र में आवासीय इलाकों में संचालित गैर-आवासीय गतिविधियों को लेकर जारी किए गए 5798 नोटिस के बाद शहर में हलचल तेज हो गई है। पेट्रोल पंप, होटल, स्कूल, अस्पताल, कोचिंग संस्थान, दुकान, कार्यालय, गोदाम, मोबाइल टावर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां करने वाले भवन मालिकों के सामने अब कई सवाल खड़े हो गए हैं। इसी बीच पटना शहरी क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की शिकायत के बाद सरकार ने मामले के समाधान के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है।
मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन से जुड़ा है। पटना नगर निगम ने आवासीय क्षेत्र में गैर-आवासीय उपयोग से संबंधित सर्वेक्षण के बाद 5798 मकान-भवन मालिकों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में संबंधित लोगों से अपने पक्ष में दस्तावेज प्रस्तुत करने और निर्धारित तिथि पर सुनवाई में उपस्थित होने को कहा गया है।
क्या है पूरा मामला?
पटना नगर निगम की ओर से जारी नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के Miscellaneous Application Diary No(s).17103/2026 in SLP(C) Nos.8044-8045/2025 में पारित आदेशों का हवाला दिया गया है। निगम के मुताबिक 25 मार्च 2026, 20 मई 2026, 9 जुलाई 2026 और 5 अगस्त 2026 के आदेशों के अनुपालन के लिए पटना नगर निगम क्षेत्र में वार्डवार सर्वेक्षण कराया गया।
सर्वेक्षण के दौरान आवासीय क्षेत्र में गैर-आवासीय गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आने पर 5798 भवन मालिकों को नोटिस दिया गया। निगम ने संबंधित गतिविधियों को अनधिकृत गैर-आवासीय उपयोग की श्रेणी में रखते हुए अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
दुकानों से लेकर स्कूल और अस्पताल तक को नोटिस
नगर निगम के नोटिस की सूची में अलग-अलग श्रेणियों की व्यावसायिक और संस्थागत गतिविधियां शामिल हैं। इनमें दुकान, गोदाम, गेस्ट हाउस, नर्सिंग होम, विवाह भवन, पार्किंग, स्कूल, हॉस्टल, होटल, उद्योग, अस्पताल, कोचिंग संस्थान, शोरूम और अन्य संस्थान शामिल बताए गए हैं।
बताया जा रहा है कि सबसे अधिक 1820 नोटिस दुकानों से संबंधित हैं। वहीं 1733 मामलों को ‘Others’ श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा 88 गोदाम, 167 गेस्ट हाउस, 34 नर्सिंग होम, 69 विवाह भवन, 294 पार्किंग, 266 स्कूल, 349 हॉस्टल और 54 होटल समेत कई अन्य श्रेणियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं।
इस कार्रवाई के बाद प्रभावित भवन मालिकों और संस्थानों में असमंजस की स्थिति है कि यदि उनकी गतिविधियां नियमों के विपरीत मानी जाती हैं तो आगे उनका संचालन कहां और किस प्रक्रिया के तहत होगा।
नोटिस में किन दस्तावेजों की मांग?
पटना नगर निगम ने संबंधित लोगों से अपने पक्ष में दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। इनमें मुख्य रूप से—
- गैर-आवासीय उपयोग के लिए अनापत्ति से संबंधित साक्ष्य या दस्तावेज
- संबंधित स्थल का भू-स्वामित्व दस्तावेज
- स्वीकृत नक्शा (Sanctioned Plan)
- अधिभोग प्रमाण-पत्र (Occupancy Certificate)
शामिल हैं।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि निर्धारित तिथि और समय पर उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा जाए। अनुपस्थित रहने की स्थिति में उपलब्ध साक्ष्य और सर्वेक्षण के आधार पर अंतिम आदेश पारित किया जा सकता है।
जनप्रतिनिधियों ने उठाया मामला

नोटिस के बाद उत्पन्न स्थिति को लेकर पटना शहरी क्षेत्र के सत्ताधारी गठबंधन के चार विधायकों – श्याम रजक, संजीव चौरसिया, संजय गुप्ता और रत्नेश कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर मामले की जानकारी दी।
जनप्रतिनिधियों ने सरकार के सामने यह मुद्दा रखा कि बड़ी संख्या में वर्षों से संचालित संस्थानों और व्यावसायिक गतिविधियों को अचानक आवासीय क्षेत्र में गैर-आवासीय उपयोग के नाम पर नोटिस मिलने से लोगों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
सरकार ने बनाई पांच सदस्यीय समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की है।
समिति में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के अलावा मंत्री रामकृपाल यादव, श्रवण कुमार और नीतीश मिश्रा तथा विधान पार्षद संजय कुमार सिंह को शामिल किया गया है। विभागीय मंत्री नीतीश मिश्रा को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।
सरकार के अनुसार समिति सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उसके अनुपालन में सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं का अध्ययन करेगी तथा जनहित में समाधान की दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
अब सबसे बड़ा सवाल आगे क्या होगा?
पटना नगर निगम की कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आवासीय क्षेत्रों में वर्षों से संचालित हजारों व्यावसायिक और संस्थागत गतिविधियों का भविष्य क्या होगा। यदि गतिविधियां नियमों के अनुरूप नहीं हैं तो उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था कैसे होगी? वहीं यदि संबंधित संस्थानों के पास वैध दस्तावेज और पूर्व में स्वीकृतियां मौजूद हैं तो उनकी स्थिति क्या होगी?
इसके अलावा यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि लंबे समय से इन इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं, तो उनके नक्शे, कर निर्धारण, लाइसेंस, पानी-कचरा प्रबंधन और अन्य नगर निकाय सुविधाओं से जुड़े मामलों की जांच किस स्तर पर हुई थी।
अब निगाहें सरकार की पांच सदस्यीय समिति पर हैं। समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर सरकार की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि 5798 मामलों का समाधान किस तरह किया जाता है और पटना के आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर आगे की नीति क्या होगी।
