पटना: बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की आठ सीटों के लिए मंगलवार से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई। नामांकन के पहले ही दिन राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अपना खाता खोलते हुए पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. संजीव कुमार को मैदान में उतारा। संजीव कुमार ने मंगलवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।

राजद ने चुनाव की घोषणा से पहले ही डॉ. संजीव कुमार को पटना शिक्षक सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था। अब उनका सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के डॉ. नवल किशोर यादव से होने की संभावना है, जो इस सीट से कई बार चुनाव जीत चुके हैं।

विधानसभा चुनाव में हार के बाद MLC चुनाव में बड़ी चुनौती

डॉ. संजीव कुमार विधानसभा चुनाव के दौरान जनता दल यूनाइटेड (JDU) छोड़कर राजद में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्होंने परबत्ता विधानसभा सीट से राजद के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब विधान परिषद चुनाव में उनके सामने शिक्षक मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की चुनौती होगी।

पांच बार चुनाव जीत चुके हैं नवल किशोर यादव

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के डॉ. नवल किशोर यादव का लंबा राजनीतिक अनुभव है। वे इस सीट से पांच बार चुनाव जीत चुके हैं। ऐसे में संजीव कुमार के सामने उनका मुकाबला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजद की कोशिश शिक्षक मतदाताओं के बीच अपने आधार को मजबूत करने की होगी।

सारण शिक्षक सीट पर ‘लालू प्रसाद यादव’ ने दाखिल किया पर्चा

नामांकन के पहले दिन सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एक निर्दलीय प्रत्याशी लालू प्रसाद यादव ने भी नामांकन दाखिल किया। उनके नाम की समानता राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के नाम से होने के कारण यह नामांकन चर्चा का विषय बन गया है।

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पहले सारण लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। ऐसे में समान नाम वाले निर्दलीय प्रत्याशी के मैदान में उतरने से सारण शिक्षक सीट का चुनाव भी दिलचस्प हो गया है।

कोसी स्नातक सीट से निर्दलीय संजीव कुमार ने भरा पर्चा

नामांकन के पहले दिन कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भी संजीव कुमार नाम के एक निर्दलीय प्रत्याशी ने अपना नामांकन दाखिल किया। इस तरह पहले दिन कुल तीन प्रत्याशियों ने पर्चा दाखिल किया, जिनमें एक दलीय और दो निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं।

नामांकन प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ विभिन्न दलों के प्रत्याशियों के मैदान में उतरने की तस्वीर साफ होगी। इसके बाद आठों विधान परिषद सीटों पर मुकाबले का स्वरूप और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।