पटना : पटना में गंगा नदी पर वाटर मेट्रो सेवा शुरू करने की महत्वाकांक्षी योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। करीब 12 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इलेक्ट्रिक जहाज “एमवी-गोमधरकुंवर” पिछले आठ महीनों से गायघाट बंदरगाह के पास खड़ा है। जहाज का रजिस्ट्रेशन और चार्जिंग स्टेशन का निर्माण अधूरा रहने के कारण सेवा शुरू नहीं हो पा रही है। फिलहाल जहाज की सुरक्षा के लिए एक गार्ड तैनात किया गया है।
दीघा घाट से कंगन घाट तक होगा संचालन

भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWI) और बिहार पर्यटन विकास निगम की इस संयुक्त परियोजना के तहत पहले चरण में वाटर मेट्रो का परिचालन दीघा घाट से कंगन घाट तक किया जाना है। पर्यटन विकास निगम के अधिकारियों के अनुसार गांधी घाट पर चार्जिंग स्टेशन तैयार हो चुका है, जबकि दीघा घाट और कंगन घाट पर काम अभी बाकी है। परिचालन के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया भी जारी है।
तकनीकी ट्रायल सफल, यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं
42 मीटर लंबे इस वातानुकूलित इलेक्ट्रिक जहाज में 50 यात्रियों के बैठने और 25 लोगों के खड़े होने की क्षमता है। जहाज में सीसीटीवी कैमरे, एलसीडी स्क्रीन, साउंड सिस्टम और चार बड़े एसी लगाए गए हैं। बड़े शीशों के जरिए यात्री गंगा के खूबसूरत नजारों का आनंद ले सकेंगे। अधिकारियों के मुताबिक “एमवी-गोमधरकुंवर” का तकनीकी ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।
भविष्य में सोनपुर और दानापुर तक विस्तार की योजना
वाटर मेट्रो सेवा को भविष्य में दानापुर के नासरीगंज, सोनपुर, हरिहरनाथ और पानापुर तक विस्तार देने की योजना बनाई गई है। जहाज की बैटरियां मात्र आधे घंटे में चार्ज हो जाती हैं और एक बार चार्ज होने पर करीब डेढ़ घंटे तक परिचालन संभव है। हालांकि, फिलहाल पटना के लोगों को गंगा में वाटर मेट्रो सेवा शुरू होने का इंतजार करना पड़ रहा है।
