नई दिल्ली: दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में बिहार ने सक्रिय सहभागिता दर्ज कराते हुए पंचायती राज संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण और ग्रामीण विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। कार्यशाला में बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश, विभाग के सचिव मनोज कुमार तथा अपर सचिव डॉ. आदित्य प्रकाश शामिल हुए।
कार्यशाला की अध्यक्षता केंद्रीय पंचायती राज तथा मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने की, जबकि केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसमें विभिन्न राज्यों के पंचायती राज मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी एवं पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यशाला के दौरान 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं, ग्रामीण स्थानीय निकायों को मिलने वाले अनुदानों के प्रभावी उपयोग, वित्तीय पारदर्शिता, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, पंचायतों की संस्थागत क्षमता, समयबद्ध व्यय, अनुपालन आवश्यकताओं तथा ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही पंचायतों की वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने, स्वयं के राजस्व (Own Source Revenue) को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण स्थानीय निकायों को विकास, सेवा-प्रदायगी और सुशासन का प्रभावी माध्यम बनाने पर विशेष बल दिया गया।
इस अवसर पर पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि राष्ट्रीय कार्यशाला में सहभागिता से प्राप्त अनुभव और सुझाव बिहार की पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने में सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार पंचायतों को विकास, पारदर्शिता और जनभागीदारी का मजबूत केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के अनुरूप प्राप्त संसाधनों का प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों की कार्यक्षमता और मजबूत होगी। इसके माध्यम से ग्रामीण आधारभूत संरचना, जनसेवाओं की उपलब्धता तथा स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को नई गति मिलेगी।
दीपक प्रकाश ने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण भारत के विकास की आधारशिला हैं। पंचायतों को वित्तीय रूप से सक्षम और प्रशासनिक रूप से सुदृढ़ बनाकर ही गांवों में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, आमजन की भागीदारी और सुशासन को मजबूत किया जा सकता है। बिहार सरकार का प्रयास है कि वित्त आयोग से प्राप्त अनुदानों का उपयोग समयबद्ध, पारदर्शी और जनहितकारी तरीके से हो, ताकि इसका लाभ राज्य के प्रत्येक गांव और प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में सशक्त, उत्तरदायी और आत्मनिर्भर पंचायती राज संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। बिहार सरकार राष्ट्रीय कार्यशाला से प्राप्त सुझावों को राज्य की पंचायती राज व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रभावी रूप से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
