नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस के शामिल होने की उम्मीद है। वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के भी सम्मेलन में पहुंचने की संभावना है।
BRICS सम्मेलन में शामिल होंगे गुटेरेस
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस के BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने की जानकारी संयुक्त राष्ट्र की ओर से सामने आई है। हालांकि, उनके दौरे की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने मंगलवार को प्रेस ब्रीफिंग के दौरान संकेत दिया कि गुटेरेस करीब 10 दिन बाद नई दिल्ली में होने वाली BRICS बैठक में हिस्सा ले सकते हैं।
भारत के लिए यह गुटेरेस का इस वर्ष दूसरा महत्वपूर्ण दौरा होगा। इससे पहले फरवरी 2026 में उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लिया था। यह ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला वैश्विक AI शिखर सम्मेलन था।
ईरान संघर्ष पर भी हुई चर्चा
इससे पहले बिश्केक में आयोजित SCO समिट के दौरान गुटेरेस ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने ईरान में जारी संघर्ष के मानवीय और आर्थिक प्रभावों को लेकर चिंता जताई।
गुटेरेस ने संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के पूर्ण सम्मान की आवश्यकता बताई। इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास नौवहन के अधिकार और स्वतंत्रता का सम्मान भी शामिल है। संयुक्त राष्ट्र ने व्यापक और स्थायी समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयासों को समर्थन देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
पुतिन, जिनपिंग और पेजेशकियन पर टिकी नजर
18वें BRICS शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के शामिल होने की उम्मीद है। वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी नई दिल्ली पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
अगर तीनों नेता सम्मेलन में शामिल होते हैं, तो नई दिल्ली में होने वाली BRICS बैठक वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बन सकती है। रूस, चीन और ईरान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग पर भी चर्चा की संभावना है।
भारत की अध्यक्षता में क्या होगा खास?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य और साझेदार देशों के राष्ट्राध्यक्षों के अलावा आउटरीच कार्यक्रम के तहत आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता के लिए ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ को थीम बनाया है। इसका फोकस लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर है।
भारत की अध्यक्षता के दौरान देश के 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय तथा सांस्कृतिक और जन-जन के संपर्क जैसे तीन प्रमुख क्षेत्रों में BRICS सहयोग को मजबूत करना है।
क्यों अहम है BRICS Summit?
BRICS का विस्तार होने के बाद इसका वैश्विक प्रभाव और दायरा पहले की तुलना में बढ़ा है। ऐसे में भारत की मेजबानी में होने वाला यह शिखर सम्मेलन वैश्विक दक्षिण, आर्थिक सहयोग, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर सदस्य देशों के बीच समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई दिल्ली में होने वाले इस सम्मेलन पर दुनिया की नजर रहेगी, खासकर इस बात पर कि इसमें रूस, चीन और ईरान के शीर्ष नेता किस स्तर पर भाग लेते हैं और भारत किन वैश्विक मुद्दों को प्राथमिकता देता है।

