नालंदा/राजगीर: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रप्रेम, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति से जुड़ाव का संदेश देने के उद्देश्य से रविवार को राजगीर की हरी-भरी वादियों में ‘तिरंगा ट्रैक’ का आयोजन किया गया। नालंदा वन प्रमंडल के राजगीर रेंज एवं जिला प्रशासन, नालंदा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस विशेष ट्रैकिंग कार्यक्रम में कुल 38 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

सुबह 7 बजे घोड़ा कटोरा इको पार्क से शुरू हुआ ‘तिरंगा ट्रैक’ इंद्रशाला गुफा होते हुए गिरियक जलाशय तक पहुंचा। हाथों में तिरंगा लेकर जब प्रतिभागियों ने प्राकृतिक पगडंडियों पर कदमताल शुरू की तो पूरा वातावरण देशभक्ति के उत्साह से भर गया। इस दौरान महिला प्रतिभागियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
पहली बार ट्रैकिंग करने वालों के लिए रहा खास अनुभव

ट्रैकिंग के दौरान प्रतिभागियों ने राजगीर की पहाड़ियों, हरियाली, वन क्षेत्र और प्राकृतिक सौंदर्य का करीब से आनंद लिया। कई प्रतिभागियों के लिए यह जीवन का पहला ट्रैकिंग अनुभव था। वहीं कुछ प्रतिभागी ऐसे भी थे, जो उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में ट्रैकिंग कर चुके हैं। उनके लिए राजगीर की पहाड़ियों और स्थानीय वन क्षेत्र में ट्रैकिंग करना एक अलग और रोमांचक अनुभव रहा।
नालंदा की युवा ट्रेकर अनमोल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने इससे पहले उत्तराखंड में ट्रैकिंग की है, लेकिन राजगीर में ट्रैकिंग का अनुभव अपने आप में अनोखा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से राजगीर की वन संपदा, प्राकृतिक विरासत और खूबसूरती को नजदीक से जानने-समझने का अवसर मिलता है।
युवाओं को नालंदा की प्राकृतिक संपदा से जोड़ना उद्देश्य
इस अवसर पर उप विकास आयुक्त, नालंदा सुश्री सारा अशरफ ने ट्रैकर्स एवं मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि आयोजन का उद्देश्य युवाओं को यह बताना है कि नालंदा, खासकर राजगीर में सांस्कृतिक विरासत के अलावा भी बेहद समृद्ध प्राकृतिक संपदा मौजूद है।

उन्होंने कहा कि लोगों के बीच यह संदेश पहुंचना चाहिए कि नालंदा कोई साधारण स्थल नहीं है, बल्कि यहां की प्राकृतिक संपदा अद्वितीय है। ऐसे आयोजन युवाओं को अपने जल, जंगल और जमीन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि ‘तिरंगा ट्रैक’ का उद्देश्य केवल ट्रैकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को प्रकृति, पर्यावरण और स्थानीय प्राकृतिक विरासत के प्रति संवेदनशील बनाना भी है।
सुरक्षा के लिए मेडिकल टीम की व्यवस्था
जिला प्रशासन की ओर से ट्रैकिंग में शामिल प्रतिभागियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। ट्रैकिंग रूट पर आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल टीम एवं आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई थीं।
तिरंगे के साथ दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
पूरे ट्रैकिंग मार्ग पर प्रतिभागी हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़ते रहे। इस दौरान ‘हर घर तिरंगा’, ‘स्वच्छ एवं हरित भारत’ और पर्यावरण संरक्षण जैसे संदेशों के जरिए राष्ट्रप्रेम के साथ प्रकृति की रक्षा का संदेश दिया गया।
सहायक वन संरक्षक, नालंदा वन प्रमंडल सिम्मी प्रियनैना ने कहा कि ‘तिरंगा ट्रैक’ को लेकर विभिन्न वर्गों के लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। उन्होंने कहा कि ट्रैकिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से लोगों को प्रकृति एवं पर्यावरण से जोड़ने के साथ-साथ राजगीर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक किया जा सकता है। आने वाले समय में भी पर्यावरण जागरूकता और प्रकृति से जुड़ी ऐसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
राष्ट्रप्रेम के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान वन विभाग और जिला प्रशासन की टीम ने प्रतिभागियों की सुविधा एवं सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा। मीडिया प्रतिनिधियों ने भी ट्रैकिंग के विभिन्न पड़ावों से कार्यक्रम की कवरेज की। सोशल मीडिया और लाइव माध्यमों के जरिए भी इस अनूठी पहल को लोगों तक पहुंचाया गया।
‘तिरंगा ट्रैक’ का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि राष्ट्रप्रेम केवल तिरंगा फहराने तक सीमित नहीं है। देश की प्राकृतिक संपदा, वन, जल, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना भी प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त, नालंदा सुश्री सारा अशरफ, सहायक वन संरक्षक, नालंदा वन प्रमंडल श्रीमती सिम्मी प्रियनैना, रेंज अधिकारी, राजगीर रेंज श्री श्याम कुमार पांडे, डायरेक्टर डीआरडीए, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, नालंदा सहित वन विभाग एवं जिला प्रशासन के पदाधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।
नालंदा से संजय कुमार की रिपोर्ट
