पटना: बिहार विधान परिषद के सभापति और भाजपा MLC अवधेश नारायण सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद विधान परिषद के सभापति पद को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि NDA के भीतर हुए सत्ता संतुलन के तहत अब यह पद जनता दल यूनाइटेड (JDU) के हिस्से में जा सकता है।

रामवचन राय का नाम सबसे आगे

सभापति पद के संभावित दावेदार के तौर पर JDU के मौजूदा उपसभापति प्रो. डॉ. रामवचन राय का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, पद खाली होने के बाद उन्हें पहले कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके बाद सभापति के चुनाव और नियुक्ति से जुड़ी औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। हालांकि, रामवचन राय को स्थायी सभापति बनाए जाने की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।

रामवचन राय लंबे समय से बिहार विधान परिषद से जुड़े रहे हैं। वह जुलाई 2024 में निर्विरोध उपसभापति चुने गए थे। मौजूदा व्यवस्था में उपसभापति होने के कारण सभापति पद खाली होने के बाद उनका नाम स्वाभाविक रूप से चर्चा में आया है।

NDA में अहम पदों के बंटवारे से जोड़कर देखा जा रहा बदलाव

अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे को बिहार में NDA के भीतर अहम संवैधानिक पदों के बंटवारे से जोड़कर देखा जा रहा है। हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद मुख्यमंत्री का पद भाजपा के पास है और विधानसभा अध्यक्ष का पद भी भाजपा के पास बताया जा रहा है। ऐसे में विधान परिषद के सभापति पद को JDU को दिए जाने की चर्चा काफी समय से चल रही थी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा और JDU के शीर्ष नेतृत्व के बीच पदों के संतुलन को लेकर सहमति बनने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम स्थिति संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया और आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

इस्तीफे के बाद आगे क्या?

अवधेश नारायण सिंह के पद छोड़ने के बाद अब नजर इस बात पर है कि विधान परिषद की कार्यवाही की अगली जिम्मेदारी किसे दी जाती है और सभापति पद के लिए औपचारिक चुनाव कब होता है। रिपोर्टों में रामवचन राय को संभावित कार्यकारी सभापति बनाए जाने की चर्चा है। फिलहाल बिहार विधान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर अवधेश नारायण सिंह को सभापति और प्रो. डॉ. रामवचन राय को उपसभापति के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि इस्तीफे के बाद आधिकारिक रिकॉर्ड में बदलाव की प्रक्रिया अभी पूरी होना बाकी है। अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद अब बिहार में NDA के भीतर महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों के बंटवारे को लेकर राजनीतिक गतिविधियों पर सबकी नजर है।