पटना : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को पटना के ताज सिटी सेंटर में आयोजित ‘ग्राम संसद-बिहार चैप्टर-V’ मुखिया संवाद कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास, पंचायतों की भूमिका, गांवों को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय स्तर पर विकास को गति देने को लेकर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों से गांवों के विकास के लिए ठोस सुझाव देने की अपील की।

परिसीमन के बाद ही होगा अगला पंचायत चुनाव

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। अगला पंचायत चुनाव परिसीमन पूरा होने के बाद ही कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंचायत और नगर निकाय क्षेत्रों का स्पष्ट निर्धारण जरूरी है। अगले वर्ष नगर निकायों के परिसीमन की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने की बात कही गई।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार लगभग 7,500 की आबादी पर एक पंचायत बनाने की दिशा में काम कर रही है। पंचायतों में विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए पंचायती राज विभाग में इंजीनियरिंग सेल विकसित करने की भी बात कही गई है।

हर पंचायत में 10 विकास योजनाओं पर काम

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान’ के तहत प्रत्येक पंचायत में 10 विकास योजनाओं पर काम किया जा रहा है। इनमें स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक भवन और आंगनबाड़ी केंद्रों के रख-रखाव, रंगाई-पुताई तथा आधारभूत सुविधाओं में सुधार शामिल हैं।

जनसमस्याओं के समाधान के लिए पंचायत स्तर पर प्रत्येक माह के पहले और तीसरे मंगलवार को सहयोग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, शिविरों में प्राप्त आवेदनों का 30 दिनों के भीतर निष्पादन सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।

हर महीने होगी ग्राम सभा की बैठक

सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को ग्राम सभा की बैठक आयोजित करने की व्यवस्था शुरू की गई है। इसके तहत साल में कम से कम 12 बार ग्राम सभा की बैठक कर गांव के विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा और निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने पंचायत सरकार भवनों के निर्माण के साथ-साथ उनके रख-रखाव पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों के बीच विकास को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, ताकि सड़क, बिजली, पेयजल, कचरा प्रबंधन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तेजी से हो सके।

2030 से पहले एक करोड़ रोजगार का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा के संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है, ताकि राज्य के विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख कम करना पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 से पहले एक करोड़ लोगों को सरकारी नौकरी एवं रोजगार उपलब्ध कराने का है। अगले चार-पांच वर्षों में ऐसी परिस्थितियां बनाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे बिहार के लोगों को मजबूरी में रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़े।

बिहार में बने उत्पादों की सरकारी खरीद में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी

मुख्यमंत्री ने स्थानीय उद्योगों और बिहार में निर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं में बिहार में निर्मित उत्पादों की कम से कम 30 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाएगा। छड़ और सीमेंट सहित स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता देने के लिए टेंडर प्रक्रिया में आवश्यक प्रावधान शामिल किए जाने की बात कही गई।

किसानों को 55 पैसे प्रति यूनिट बिजली

कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को कृषि कार्यों के लिए 55 पैसे प्रति यूनिट की रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। इस पर हर वर्ष करीब 5 हजार करोड़ रुपये खर्च होने की बात उन्होंने कही। राज्य के सभी कृषि फीडरों को सोलराइज करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।मुख्यमंत्री ने बिहार में प्रत्येक परिवार को प्रतिमाह 125 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की बात भी कही।

2037 तक समृद्ध बिहार बनाने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत और वर्ष 2037 तक समृद्ध, सशक्त एवं विकसित बिहार बनाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने ग्राम संसद के माध्यम से गांवों की वास्तविक जरूरतों और समस्याओं से जुड़े सुझाव सामने लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि “गांव की समृद्धि देश की समृद्धि है। गांव विकसित होगा, तभी देश विकसित होगा।”

कार्यक्रम को उच्च शिक्षा सह विधि मंत्री संजय सिंह टाइगर, विधान पार्षद एवं ग्राम संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय मयूख, ग्राम संसद के उपाध्यक्ष दीपक ठाकुर और नेशनल ब्रांड एम्बेस्डर किरण प्रभाकर ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम में बिहार राज्य मुखिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश राय, बिहार राज्य पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद निराला, ग्राम संसद के संस्थापक एवं महासचिव ब्रजेश शर्मा, महासचिव मृत्युंजय सिंह सहित बड़ी संख्या में मुखिया और सरपंच मौजूद रहे।