बेगूसराय/पटना: बिहार सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) ने बेगूसराय जिला परिवहन कार्यालय (DTO) में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक क्लर्क और एक दलाल को ₹6,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे कार्यालय में हड़कंप मच गया और कई कर्मचारी दफ्तर छोड़कर निकल गए।

निगरानी विभाग मुख्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बेगूसराय जिले के चेरिया बरियारपुर थाना क्षेत्र स्थित सकरौली गांव निवासी सत्यम कुमार ने पटना स्थित निगरानी ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वाहन के ओनरशिप ट्रांसफर (हस्तांतरण) के लिए DTO कार्यालय के कर्मियों द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है।

शिकायत के सत्यापन के बाद आरोप सही पाए गए। इसके आधार पर कांड संख्या- 0-063/26 दर्ज कर डीएसपी रंजीत कुमार निराला के नेतृत्व में विशेष धावादल टीम का गठन किया गया। टीम ने जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

1. संजय कुमार, लिपिक (क्लर्क), DTO कार्यालय, बेगूसराय — कार्यालय कक्ष से गिरफ्तार।

2. शिवानंद झा, कथित बिचौलिया — व्यवहार न्यायालय, बेगूसराय के दक्षिणी गेट के पास ₹6,000 रिश्वत राशि के साथ गिरफ्तार।

जांच में सामने आया भ्रष्टाचार का नेटवर्क

विजिलेंस की प्रारंभिक पूछताछ में DTO कार्यालय में कथित भ्रष्टाचार के एक संगठित नेटवर्क के संकेत मिले हैं। सूत्रों के अनुसार, कार्यालय में विभिन्न कार्यों के लिए तय दरों पर अवैध वसूली की जाती थी और बिना पैसे दिए फाइलों का निष्पादन मुश्किल बताया जाता था।

जांच के दौरान चंद्रप्रकाश गौतम नामक एक अन्य क्लर्क का नाम भी सामने आया है, जो मूल रूप से मुंगेर जिले का निवासी बताया जा रहा है। आरोप है कि वह भी इस कथित वसूली तंत्र का हिस्सा था। फिलहाल वह फरार बताया जा रहा है और उसकी तलाश की जा रही है।

“ऊपर तक पैसा पहुंचाने” का दिखाया जाता था डर

सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि आवेदकों को “ऊपर तक पैसा पहुंचाने” की बात कहकर उनसे अतिरिक्त रकम की मांग की जाती थी। विजिलेंस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

भागलपुर विशेष न्यायालय में होगी पेशी

गिरफ्तार दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए पटना लाया गया है। आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उन्हें विशेष न्यायालय (निगरानी), भागलपुर में पेश किया जाएगा।

दोषियों को नहीं मिलेगी राहत

निगरानी विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मामले की गहन जांच जारी है। जांच में जो भी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह भी कहा है कि सरकारी कार्यालयों में बिचौलियों और भ्रष्टाचार के सिंडिकेट को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बेगूसराय से नवीन कुमार की रिपोर्ट

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