पटना: भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार की राजनीति लगातार गर्म होती जा रही है। एक तरफ मामले की जांच न्यायिक आयोग कर रहा है, तो दूसरी ओर इसे लेकर राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन अलग-अलग मंचों पर सक्रिय हो गए हैं।

24 जून को भरत तिवारी के समर्थन में आयोजित महापंचायत के बाद अब 5 जुलाई को भोजपुर के जगदीशपुर स्थित लाल बिहारी सिंह टोला हाईस्कूल मैदान में बहुजन महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की गई है। इस आयोजन को भरत तिवारी समर्थक महापंचायत के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

आयोजकों का कहना है कि इस महापंचायत का उद्देश्य बहुजन समाज को एकजुट करना और राज्य सरकार के नेतृत्व के समर्थन का संदेश देना है। इस कार्यक्रम की राजनीतिक अहमियत तब और बढ़ गई जब केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने इसमें शामिल होने का ऐलान किया।

मांझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “देश की जनता करें पुकार, बहुजन एकता अबकी बार”। उन्होंने कहा कि वह 5 जुलाई को आरा पहुंचकर जगदीशपुर में आयोजित बहुजन महासभा में हिस्सा लेंगे।

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर मांझी पहले भी सरकार के पक्ष में खुलकर अपनी राय रख चुके हैं। उनका कहना है कि दलित के एनकाउंटर पर लोग उसे नक्सली और मुसलमान के एनकाउंटर पर आतंकवादी बताने में देर नहीं करते, लेकिन भरत तिवारी मामले में वही लोग पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि भरत तिवारी के पास अवैध हथियार कहां से आया और किन लोगों के संरक्षण में इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है, इसकी भी जांच होनी चाहिए। मांझी ने कहा कि देश संविधान से चलेगा, अवैध हथियारों के दम पर नहीं। उनके अनुसार भरत तिवारी के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज थे।

वहीं, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने इस पूरे मामले में संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने घटना की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया है, इसलिए सभी पक्षों को आयोग की रिपोर्ट आने तक इंतजार करना चाहिए और मामले का राजनीतिकरण करने से बचना चाहिए।